दुष्कर्म मामला: केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस

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Friday, January 17, 2014-7:35 PM

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने मुजफ्फनगर के सांप्रदायिक दंगों के दौरान कथित रूप से सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई सात महिलाओं की याचिका पर आज केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया। ये महिलाएं चाहती हैं कि उनके द्वारा दर्ज कराए गए मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित हो।

प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने केन्द्र और राज्य सरकार से इस याचिका पर दो सप्ताह के भीतर जवाब- तलब किया है। संयुक्त रूप से याचिका दायर करने वाली महिलाओं ने उनके मुकदमे दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करने का भी अनुरोध किया है।
 
याचिका में इन महिलाओं से सामूहिक बलात्कार, हमला, आगजनी, संपत्ति की लूटपाट, गंभीर रूप से जख्मी करने, हत्या के प्रयास और दूसरे अपराध करने संबंधित उनके और उनके परिजनों के आरोपों की जांच के लिए वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश से बाहर के पुलिस अधिकारियों का विशेष जांच दल गठित करने का अनुरोध किया है।

याचिकाकर्ताओं की वकील कामिनी जायसवाल ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश पुलिस आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है जबकि वे खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी के आदेश देने का भी न्यायालय से अनुरोध किया।

याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार स्पष्ट रूप से अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी के प्रति पूरी तरह विफल हो गई है। मुजफ्फरनगर के सांप्रदायिक दंगों के दौरान उनके साथ दूसरे समुदाय के लोगों ने सामूहिक बलात्कार और यौन शोषण किया और प्राथमिकी में उनके नामों का खुलासा किए जाने के बावजूद उन्हें बेखौफ घूमने दिया जा रहा है।

याचिका के अनुसार याचिकाकर्ताओं से सामूहिक बलात्कार और दूसरे अपराधों के आरोप में एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। इससे स्पष्ट है कि पुिलस और विशेष जांच प्रकोष्ठ की कवायद लीपापोती करने की है और उनकी जांच में विश्वसनीयता और सत्यनिष्ठा की कमी है।
 


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