मोदी इरादों के पक्के, इनके विचार जानना चाहते हैं: यूरोपीय संघ

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Friday, January 17, 2014-8:15 PM

नई दिल्ली: भारत के राजनीतिक परिदृश्य में नरेन्द्र मोदी को प्रख्यात शख्सियत करार देते हुए यूरोपीय संघ ने आज कहा कि वह साल 2002 के दंगों के संबंध में गुजरात के मुख्यमंत्री को क्लीन चिट दिए जाने के न्यायिक फैसले का सम्मान करता है, जिसके बारे में दुनिया भर में काफी चिंताएं थी।

भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत जोआओ कारविन्हो ने कहा कि गुजरात दंगों के संबंध में 28 सदस्यीय संघ के विचार भारत की न्यायिक एवं राजनीतिक प्रक्रिया पर आधारित हैं और वह मोदी से उसी तरह जुड़े हैं जैसे अन्य नेताओं से। कारविन्हो ने कहा, ‘‘राजनीतिक परिदृश्य में वह इरादों के पक्के व्यक्ति हैं इसलिए हम उनके विचार जानने और सत्ता में आने पर उनकी योजनाओं को देखने में रूचि रखते हैं।’’

उन्होंने कहा, हमारा रूख न्यायिक एवं राजनीतिक प्रक्रियाओं का सम्मान करना है। भारतीय न्यायिक प्रणाली की दक्षता और क्षमता हमारे लिये कोई मुद्दा नहीं है। गौरतलब है कि मजिस्ट्रेट की अदालत ने पिछले महीने उच्चतम न्यायालय की ओर से नियुक्त जांच दल द्वारा मोदी को क्लीनचिट दिए जाने को बरकरार रखा था, जो दंगों के दौरान गुलबर्गा सोसाइटी में 68 लोगों की हत्या से संबंधित है। यूरोपीय संघ के राजदूत ने कहा कि यूरोपीय संघ बिना सक्रियता दिखाये भारत में राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है और वह मोदी समेत सभी महत्वपूर्ण राजनीतिक नेताओं के सम्पर्क में है।

उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ ने कभी भी गुजरात दंगों पर कोई आधिकारिक रूख अख्तियार नहीं किया लेकिन इतना जरूर कहा कि दुनिया में 2002 की त्रासदी पर काफी चिंता है। पिछले वर्ष यूरोपीय संघ की ओर से मोदी के लिए भोज का जिक्र करते हुए ईयू के राजदूत ने कहा, ‘‘पहले हमने भारत के विभिन्न इलाकों के बारे में चर्चा की। हमने कई मुख्यमंत्रियों से चर्चा की। हमने विभिन्न मुख्यमंत्रियों के लिए भोज आयोजित किया। इसलिए इसे विचित्र या अनोखी घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि गुजरात और यूरोपीय संघ के बीच कारोबार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि कंपनियां भाजपा शासित राज्य में कई वर्षो से सक्रिय थीं। उन्होंने कहा, कारोबार के लिहाज से कभी कोई मुद्दा नहीं रहा। यूरोपीय कंपनियां गुजरात में सक्रिय हैं और काफी वर्षो से वहां हैं। उनकी गतिविधियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। राजदूत ने कहा, जो कोई भी प्रधानमंत्री होगा, हम निश्चित तौर पर लोकतांत्रिक स्थिति की वैधता का सम्मान करेंगे। हम उनके साथ उसी तरह से काम करेंगे जैसा किसी और के साथ करते।


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