अनशन की भेंट चढ़ सकता है मुनक नहर का सामाधान

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Friday, January 17, 2014-10:39 PM

 नई दिल्ली : दिल्ली और हरियाणा के बीच वर्षो विवाद की वजह बनी मुनक नहर की समस्या के सामाधान के लिए आगामी 20 जनवरी को अरविंद केजरीवाल और हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा बीच मुलाकात होना तय है। जबकि केजरीवाल का कहना है कि 20 को ही केजरीवाल द्वारा दिल्ली पुलिस के मसले पर गृह मंत्रालय के समक्ष धरने पर बैठने के एलान के मद्देनजर कहना मुश्किल है कि यह मुलाकात हो भी पाएगी अथवा नहीं।

 
 मुनक नहर को लेकर दिल्ली हरियाणा के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। करीब 102 किलोमीटर लंबी पक्की नहर बनाने का फैसला वर्ष 2003 में लिया गया था। इसका मकसद था कि हरियाणा से दिल्ली आ रही यमुना के पानी को यदि पक्की नहर के माध्यम से लाया जाए तो इससे लगभग 140 एमजीडी (मिलियन गैलन) पानी रोजाना मिल सकता है।
 
तय हुआ था कि इसमें से 80 एमजीडी पानी दिल्ली और 60 एमजीडी हरियाणा को मिलेगा। इसके लिए दिल्ली जल बोर्ड को लगभग 200 करोड़ रुपये हरियाणा सरकार को देने थे।विवाद उस समय शुरू हुआ, जब 2008 में नहर बन कर तैयार होने के वक्त हरियाणा अतिरिक्त पैसे की मांग करने लगा। इस मुद्दे को निपटाने के लिए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने मंत्रियों के समूह का गठन किया था।
 
अगस्त 2011 में हुई बैठक में हरियाणा और दिल्ली के बीच सहमति हुई। सहमति के मुताबिक दिल्ली सरकार हरियाणा को पहले 50 करोड़ रुपये देगी और पानी मिलने के बाद हरियाणा को 106 करोड़ रुपये दे देगी। दिल्ली द्वारा अब तक 404 करोड़ रुपये देने के बावजूद  हरियाणा सरकार पानी देने के लिए तैयार नहीं है। दिल्ली जल बोर्ड ने बवाना और ओखला में प्लांट बनाने पर लगभग एक हजार करोड़ रुपये भी किया है।
 

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