रोड सेफ्टी बिल 3 साल से ठंडे बस्ते में

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Saturday, January 18, 2014-1:23 PM

नई दिल्ली (सतेन्द्र त्रिपाठी): सड़क दुर्घटनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण नेशनल रोड सेफ्टी एंड ट्रैफिक मैनेजमैंट बोर्ड बिल 3 साल से फाइलों की धूल फांक रहा है। इसे सुधार के लिए वापस क्या भेजा गया है कि वह गायब ही हो गया। इस बिल में दुर्घटनाओं के लिए हर सिविक एजैंसी की जिम्मेदारी तय करने की बात थी।

कई गंभीर मामलों पर कानून होने के बाद अमल ही नहीं होता है। सैंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट में हर दुर्घटना का अध्ययन जरुरी होने के बावजूद ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है। केवल पुलिसकर्मी ही दुर्घटना का कारण तय कर देते हैं। रोड सेफ्टी के लिए तो आज के माहौल में एक कार्यक्रम भर बनकर रह गया है। सरकारी कार्यक्रमों लोगों को जागरूक करने की बातें होती है और फिर सब शांत हो जाते है।

यह जानकारी देते हुए इंडियन फाऊंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग के सीनियर फैलो एस.पी. सिंह का कहना है कि कुछ ठोस करने की जरूरत है। विभिन्न राज्यों में दुर्घटनाओं का अध्ययन करने वाले एस.पी.सिंह ने बताया कि रोड सेफ्टी के लिए नैशनल रोड सेफ्टी एंड ट्रैफिक मैनेजमैंट बोर्ड बिल 2010 बनाया गया था। वह संसद की स्थायी समिति पहुंचा तो उसमें तमाम खामियां पाई गई। उसे दोबारा लाने के लिए सुधार हेतू वापस भेज दिया है लेकिन वह बिल कहां गया, किसी कोई पता नहीं।

इस बिल में दुर्घटना की जिम्मेदारी तय करने की बात थी। इसमें यह देखा जाता है कि दुर्घटना के लिए जिम्मेदार कौन है। कहीं वाहन निर्माण में तो कमी नहीं थी, सड़क में दिक्कत तो नहीं है, हमेशा ड्राइवर की गलती बात दी जाती है। उन्होंने बताया कि सैंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 135 के तहत यह अनिवार्य है कि हर दुर्घटना की रिसर्च होने चाहिए, जिससे कारणों का पता लगाकर उन्हें दूर किया जा सकें। यह केवल हिमाचल प्रदेश में होता है, जहां टैक्नीकल कमेटी है। दिल्ली में तो सिपाही ही तय कर देता है कि हादसे के लिए फलां
दोषी है।

वह कहते है कि ट्रकों में ओवरलोडिंग एक आम बात हो गई है। इससे दुर्घटनाएं आम है लेकिन इसे लेकर कोई सख्ती नहीं हो पा रही है। हादसों के बाद ड्राइवरों को ट्रेनिंग देने की बात होती है तो फिर लाइसैंस देने से पहले ट्रेनिंग क्यों नहीं दी जाती है। मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन कर जुर्माना 10 गुना करने सहित कई सख्ती के मामले राज्यसभा से पास हो चुके और लोकसभा में प्रतीक्षा कर रहे है। अगर लोकसभा में इस संशोधन को पास करने में दिक्कत है तो इस पर तत्काल अध्यादेश लाना चाहिए। रोड सेफ्टी के लिए एक दिन भी रुकना गलत है। वह कहते है कि रोड सेफ्टी केवल रस्मी अदायगी न बने, इस पर सख्ती भी हो।


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