यहां बाबा नहीं बेबी सिखाती है योग

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Saturday, January 18, 2014-1:41 PM

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में नौ वर्षीय एक बच्ची प्रशिक्षक बनकर बड़े-बुजुर्गों को योग का पाठ पढ़ा रही है। संगम नगरी इलाहाबाद स्थित एक आश्रम में इस नन्ही योग प्रशिक्षिका से लोग मन से प्रसन्न और तन से स्वस्थ रहने का गुर सीखते हैं। इलाहाबाद के झूसी इलाके में स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती कैवल्य धाम (आश्रम) में श्रुति पांडे योग प्रशिक्षिका बनकर आस-पास की विभिन्न कॉलोनियों के करीब 150 से अधिक महिलाओं, नौकरीपेशा, व्यवसायियों और विश्वविद्यालय के छात्रों को रोज योगासन कराती है।

कैवल्य धाम के प्रमुख हरिचेतन महाराज ने बताया, ‘‘वह किसी व्यावसायिक प्रशिक्षक की तरह योग के विभिन्न आसन कराती है। योगासन कराने के दौरान वह इस बात का पूरा ध्यान रखती है कि कोई गलत आसन न करे।’’ महाराज ने बताया कि योग सत्र हर रोज सुबह साढे पांच बजे शुरू होकर एक घंटे तक चलता है।

इलाहाबाद के सेंट्रल एकेडमी स्कूल में कक्षा पांच की छात्रा श्रुति को योग का प्रशिक्षण हरि चेतन महाराज ने दिया है। वह जब चार साल की थी तभी उसने आश्रम में योग सीखना शुरू कर दिया था। महाराज कहते हैं कि वह श्रुति की सीखने की गति को देखकर चकित थे। महज छह माह के प्रशिक्षण में वह बेहद निपुण हो गई थी। वहीं, श्रुति कहती है कि उसे योग सिखाना बहुत अच्छा लगता है। लोग उसकी कही बातों को मानते हैं। आश्रम की तरफ  से योग सिखाने का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। श्रुति के अभिभावकों को अपनी बेटी की इस काबिलियत पर बहुत नाज है।

श्रुति की मां ने कहा, ‘‘हमें बहुत अच्छा लगता है कि इतनी कम उम्र में वह ऐसा काम कर रही है। योग से निरोगी काया मिलती है। योग सिखाकर लोगों की सेवा कर रही हमारी बेटी पर हमें गर्व है।’’

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