3 बार जुर्माना, पर सुधरे नहीं अफसर

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Saturday, January 18, 2014-1:57 PM

नई दिल्ली  (धनंजय कुमार): दिल्ली कैंट में 14 वर्ष पहले नौकरी से सेवा निवत्त महिला आज तक कैंट के दफ्तरों का चक्कर काट रही है लेकिन उसे सही जानकारी देने के बजाय घुमाया जा रहा है। परेशान महिला ने सूचना का अधिकार के हथियार उपयोग किया लेकिन स्थिति ढाक के 3 पात वाली रही। जबकि यहां के मुख्य जनसूचना अधिकारी पर 2 बार और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पर एक बार जुर्माना हो चुका है।

उषा कपूर दिल्ली कैंट के सी.डी. प्राइमरी स्कूल में सहायक शिक्षिका के पद पर कार्यरत थीं। इस स्कूल में पहली बार उन्होंने 6 मार्च 1966 को अस्थायी शिक्षिका के रूप में ज्वाइन किया लेकिन एक वर्ष बाद उन्हें हटा दिया गया।  26 सितम्बर 1969 से स्थायी शिक्षिका के रूप में ज्वाइन किया। इस दौरान उन्हें सिर्फ एक पदोन्नति मिली वह भी ए.सी.पी. (एस्योर्ड कॅरियर प्रमोशन) नियम के तहत। 31 मई 2000 को सेवानिवृत्त हो गईं लेकिन उन्हें दूसरी पदोन्नति नहीं मिली, जबकि वह इसकी पूरी हकदार थीं। पदोन्नति के लिए आई 47 शिक्षिकों की सूची में उनका भी नाम था। 

उषा  बताती हैं कि मैने जब इसकी जानकारी मांगी तो हमें कभी आश्वासन देकर तो कभी फटकार कर भेज दिया जाता था लेकिन कभी पदोन्नति न मिलने की वजह नहीं बताई गई। इसी दौरान वर्ष 2005 सूचना का अधिकार कानून आया तो उम्मीद की एक किरण दिखी। मैनें विभाग से इस कानून के तहत जानकारी मांगी तो हमें बताया गया कि आपके पास पदोन्नति के लिए निर्धारित डिग्री नहीं है।

उषा कहती हैं कि मैने इसके खिलाफ मुख्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया, जहां से कैंट के मुख्य जनसूचना अधिकारी पर मार्च 2012 में 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया जिसे बाद में कम कर 5 हजार रुपए किया गया। इस बारे में दिल्ली कैंट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव कुमार कहते हैं कि हम मामले की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं और उनकी परेशानी को जल्द ही दूर किया जाएगा।


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