आतंक का पर्याय बने आदमखोर बाघिन का कहीं अता पता नही

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Saturday, January 18, 2014-2:35 PM

मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद मण्डल में पिछले एक पखवाडे से आतंक का पर्याय बनी आदमखोर बाघिन का कहीं अता पता नहीं चल पा रहा है। गत पन्द्रह दिनों में उत्तराखण्ड से रास्ता भटके बाघिन के हमले से उत्तर प्रदेश के जिम कार्बेट नेशनल पार्क से सटे मुरादाबाद और बिजनौर जिले के छह लोग जान से हाथ धो बैठे हैं। वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारी लगातार कामिं्बग कर बाघ की तलाश में जंगलों को खंगाल रहे हैं।

मुरादाबाद मंडल के आयुक्त शिव शंकर सिंह ने बताया कि ग्रामीण इलाको में सावधानी बरतने की हिदायत के साथ ही उत्तर प्रदेश की सीमावर्ती क्षेत्रों से बाघ के चले जाने की जानकारी नहीं मिल जाती है तब तक अभियान को रोका नहीं जाएगा। उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड हो या पूर्वोत्तर के राज्य या उडीसा जंगली जानवरों के रिहायशी खेतों में घुस आना अब आम बात हो गयी है।

उन्होंने कहा कि बाघ और इंसानों के बीच बढते टकराव को रोकना वन विभाग और प्रशासन के समक्ष चुनौती बनकर सामने आ रही है और इसे रोके बिना बाघ संरक्षण की बात सोचना बेमानी है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बाघों का संरक्षण अहम चुनौती बना हुआ है। जंगलों में इंसानों का दखल बढने से इंसानों और जानवरों का संघर्ष बढता जा रहा है। वन्य जीव प्रेमी एवं भाजपा सांसद मेनका गांधी ने उत्तर प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि आदमखोर बाघिन को मारा न जाय बल्कि इसे पकडकर उत्तराखण्ड के जंगलों में भेज दिया जाये। यह बाघिन सिर्फ अपना रास्ता भटक गयी है यह आदमखोर नहीं है।


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