देर से न्याय : पत्नी को मिलेगी पेंशन

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Sunday, January 19, 2014-2:36 PM

नई दिल्ली (मनीषा खत्री): वाहनों को ठीक से रिपेयर न कराने के बावजूद बिल पास करने के एक मामले में नौकरी से बर्खास्त किए गए एक सी.आर.पी.एफ. के कर्मी ने न्याय पाने के लिए 14 साल कानूनी लड़ाई लड़ी। परंतु जब न्याय का समय आया तो पता चला कि वह पहले ही स्वर्ग सिधार चुका है। 

ऐसे ही एक मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि इस कर्मी को बर्खास्त करके उसे कड़ी सजा दी गई थी, जबकि इसी मामले में फंसे एक एस.आई. के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। ऐसे में हम उसको बर्खास्त करने के आदेश को रद्द कर रहे हैं और चाहते थे कि उसके मामले को फिर से अनुशासनात्मक अधिकारी के पास भेज दें। 

इस अदालत में यह मामला 14 साल चला और फैसला आने से पहले याचिकाकत्र्ता  राम करण सिंह की मौत हो गई। ऐसे में उसके 36 साल के अच्छे रिकार्ड को देखते हुए यह आदेश दिया जाता है कि जिस दिन से उसे बर्खास्त किया गया है,उसे उस दिन से रिटायर माना जाए। ऐसे में अब उसके रिटायर होने से लेकर अब तक की अवधि के नियमों के हिसाब से उसकी पत्नी को पेंशन का लाभ दिया जाए। पुराने एरियर की राशि 12 सप्ताह में उसकी पत्नी के दे दी जाए।

राम करण सिंह ने 21 नवम्बर 1962 में सी.आर.पी.एफ. में नौकरी ज्वाइन की थी। 31 अगस्त 1998 को उसे यह कहते हुए नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया कि उसने 4 वाहनों के रिपेयरिंग के बिल गलती से पास करवा दिए। इन बिलों के बदले कुल एक लाख 27 हजार 423 रुपए दिए गए थे। 

इसी बर्खास्तगी को उसने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उसका कहना था कि काम के बोझ के चलते वह बिल ठीक से चैक नहीं कर पाया, परंतु जब उसे पता चला कि वाहन ठीक से रिपेयर नहीं हुए हैं तो उसने अपने उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया था।


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