‘धनकुबेर’ अफसरों पर नीतीश की टेढ़ी नजर

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Sunday, January 19, 2014-3:19 PM

पटना: बिहार में नीतीश कुमार की सरकार यूं तो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का प्रयास लगातार करती रही है, मगर इसमें आशा के अनुरूप सफलता मिलती नहीं देख मुख्यमंत्री ने एक बार फिर अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें भ्रष्टाचार दूर करने का कड़ा निर्देश दिया है। नीतीश ने सत्ता संभालने के तुरंत बाद भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों पर लगाम लगाने की दिशा में कदम बढ़ाया था। रिश्वत लेने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को बड़ी संख्या में पकड़ा गया, वहीं पिछले वर्ष 10 भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्ति जब्त की गई।

नीतीश सरकार ने भ्रष्टाचार की जड़ों में मट्ठा डालने के लिए न केवल निगरानी विभाग को चुस्त-दुरुस्त किया, बल्कि विशेष आर्थिक अपराध इकाई का गठन भी किया। निचले स्तर पर कार्यालयों में बिचौलियों पर अंकुश लगाने के लिए ‘ऑपरेशन दलाल’ शुरू किया गया। इसके अलावा भ्रष्ट लोकसेवकों की संपत्ति जब्त करने के लिए बिहार विशेष अदालत अधिनियम 2006 बनाया गया।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2006 से अब तक रिश्वत लेते 554 से ज्यादा लोकसेवकों को गिरफ्तार किया गया है। इस दौरान 70 लाख रुपये से ज्यादा की काली कमाई बरामद की गई है। वर्ष 2006 में जहां ट्रैप में रंगे हाथों पकड़े गए लोकसेवकों की संख्या 61 थी, वहीं 2007 में इसकी संख्या बढ़कर 104 तक जा पहुंची। वर्ष 2008 और 2009 में 77-77 लोकसेवकों को रंगे हाथ रिश्वत लेते पकड़ा गया, जबकि 2010 में 65, 2011 में 60, 2012 में 56 और पिछले वर्ष 54 लोकसेवकों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के एक अधिकारी बताते हैं कि ट्रैप मामलों में करीब 70 लाख 34 हजार रुपये जब्त किए गए हैं। पुलिस महानिदेशक (निगरानी) पी$ के. ठाकुर कहते हैं कि भ्रष्ट लोकसेवकों के खिलाफ  निगरानी ब्यूरो सख्त है। कई भ्रष्टचारियों की संपति जब्त हुई है और आगे की कारवाई के लिए कानूनी प्रक्रिया जारी है। निगरानी विभाग कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2012-13 में 10 भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्ति जब्त हुई। निगरानी विभाग ने अभी तक 53 भ्रष्ट लोकसेवकों की संपत्ति जब्त करने की सूची तैयार की है।

संपत्तियां जब्त करने वाले अधिकारियों में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं तो पूर्व पुलिस महानिदेशक नारायण मिश्रा भी शामिल हैं। जब्त संपत्तियों (बड़े मकानों) में स्कूल खोले गए हैं, कई और भवनों में भी ऐसा ही करने की तैयारी है। बिहार के मुख्य सचिव अशोक कुमार सिन्हा ने कहा, ‘‘भ्रष्ट लोकसेवकों के प्रति नरम रवैया रखने वाले हमारे अधिकारी भी नपेंगे। इस बात की जांच की जा रही है कि विभागीय कारवाई के मामले में किसी अधिकारी ने किसी लोकसेवक को रियायत तो नहीं दी है।’’

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों को तार्किक परिणति तक ले जाने की दिशा में हर कदम उठाए जा रहे हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों को उन मामलों की सूचना भेज दी है, जिसमें विभागीय कारवाई होनी है। सिन्हा बताते हैं कि भ्रष्टाचार के कुल 880 मामलों में से 856 मामलों में आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं। इनमें आय से अधिक संपत्ति अर्जित वाले 108 मामले हैं। राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अभयानंद कहते हैं कि पुलिस महकमे में वर्ष 2006 से अब तक भ्रष्टाचार से जुड़े 42 मामलों में संबंधित पुलिस अधिकारी को बर्खास्त किया जा चुका है।
 


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