ठंड से मौत के बाद भी नहीं बदले हालात

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Sunday, January 19, 2014-3:32 PM

 नई दिल्ली : बाहरी दिल्ली स्थित नरेला अनाज मंडी में लगभग दस दिनों पहले में ठंड से हुई मजदूर की मौत के बाद भी यहां हालात नहीं बदले है। अभी भी मंडी में काम करने वाले मजदूरों की बड़ी संख्या यहां खुले में सोने को मजबूर है।

 जिससे मंडी प्रशासन के साथ ही दिल्ली सरकार के उन दावों की पोल खुलती नज़र आ रही है। जिसमें आम आदमी पार्टी सरकार के मंत्री सर्द रातों में सड़कों पर घूमकर 48 घंटों में नए रैन बसेरों का निर्माण करने की बात कहीं थी। वहीं, अब स्थानीय संगठनों द्वारा मंडी में ही इन लोगों के लिए अस्थाई रैन बसेरा बनाने की मांग की जा रही है। जिससे यहां काम करने वाले लोगों के साथ ही मंडी के बाहर सोने वाले लोगों को राहत मिल सके।
 
क्या है मामला : एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी में बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों से काम करने के लिए मजदूर और उत्तर प्रदेश, हरियाणा व पंजाब के किसान भी आनाज बेचने के लिए आते है। ऐसे में यहां सुविधाओं के अभाव में मजदूरों और किसानों को कड़ाके की ठंड में खुले में सोना पड़ रहा है।
 
प्रशासन की इसी लापरवाही के कारण से लगभग दस दिनों पूर्व मंडी के प्लेटफॉर्म नम्बर दो पर ठंड से एक मजदूर की मौत हो गई थी। जिसके बाद भी यहां हालात नहीं बदले है। वर्तमान में भी यहां बड़ी संख्या में लोग खुले में सो रहे है। जो सरकार और मंडी प्रशासन के लिए बेहद शर्मनाक स्थिति है।

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