'जयपुर साहित्य महोत्सव, समाप्त नहीं हुआ है रंगमंच'

  • 'जयपुर साहित्य महोत्सव, समाप्त नहीं हुआ है रंगमंच'
You Are HereNational
Monday, January 20, 2014-10:38 AM

जयपुर: नाटककार और रंगमंचकर्मी महेश दत्तानी ने आज इस बात को खारिज किया कि रंगमंच समाप्त हो चुका है और कहा कि दृश्यों से भरे सिनेमा की इस आधुनिक दुनिया में रंगमंच ने अपने लिए एक खास जगह बनार्इ है। 

जयपुर साहित्य महोत्सव के सत्र में दत्तानी ने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि रंगमंच वाकई खत्म हो चुका है। यह सिर्फ आपके बैठकों में होने वाली चर्चा है कि नाटक समाप्त हो चुके हैं बौर सिनेमा उसकी जगह ले रहा है।’’उन्होंने कहा कि कला की अभिव्यक्ति का श्रेष्ठ माध्यम होने के नाते सिनेमा दर्शकों को बांधे रखता है लेकिन रंगमंच का अपना ही स्थान है। पटकथा लेखक और फिल्म निर्माता 56 वर्षीय दत्तानी का कहना है कि रंगमंच का फिल्मों से प्रभावित होना संभव है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि रंगमंच सिनेमा से प्रतिस्पर्धा करता है, वह बिल्कुल अलग माध्यम है। आप सिनेमा एक कारण से जाते हैं तो रंगमंच की ओर रूख करने का कारण दूसरा होता है। वर्तमान में रंगमंच का रूख करने वाले सभी दर्शक सिनेमा देखने भी जाते हैं लेकिन सभी सिनेमा वाले नाटक देखने नहीं जाते।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे में रंगमंच का सिनेमा से प्रभावित होना स्वभाविक है ।’’ दत्तानी ने पटकथा, स्क्रीनप्ले और रंगमंच में बदलने की क्षमता आदि के संबंध में आयोजित सत्र ‘‘आई, मी एण्ड माई प्लेज’’ में बातचीत के दौरान यह बातें कहीं ।


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You