जामा मस्जिद : जहां आज भी जिंदा है पतंगबाजी

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Monday, January 20, 2014-1:18 PM

नई दिल्ली: दिल्ली में पतंगबाजी सिर्फ स्वतंत्रता दिवस के मौके तक ही सिमट कर रह गई है। लोगों में पतंगबाजी का शौक लगभग खत्म हो चुका है। लेकिन जामा मस्जिद ऐसा इलाका जगह है, जहां इसके शौकीन लोगों ने पतंगबाजी के खेल को जिंदा रखा हुआ है। उनमें पतंग को उड़ाने की ऐसी तलब होती है कि वह घण्टों-घण्टों तक अपनी पतंग को आसमान में ताने रहते हैं। कभी पतंग को खीच मारकर एकदम आसमान में तान देते हैं तो कभी आजाद परिंदे की तरह ढील देकर छोड़ देते हैं।

अक्सर यहां पतंगबाज ग्रुप बनाकर एक दूसरे से कई तरह की प्रतियोगिताएं भी करते हैं। लेकिन जीत का प्ररिणाम अंधेरा होने पर पता चलता है कि किस ग्रुप ने कितनी पतंगे काटीं और किसी की कतनी कटीं। पुरनी दिल्ली के रहने वाले कारोबारी फहीमुद्दनी कुरैशी का कहना है कि लोगों के पास अब वक्त नहीं बचा है कि वह पतंगबाजी या कबूतरबाजी जैसा शौक पूरा कर सकें।

इसके लिए वक्त चाहिए, जोकि  रोजमर्राह की भागदौड़ भरी जिन्दगी में लोगों के पास बचा नहीं हैं। लेकिन पुरानी दिल्ली में रहने वाले बहुत से लोग ऐसे हैं, जिन्हें पतंगबाजी का बेहद शौक है। वह किसी तरह अपना वक्त निकालकर शौक को पूरा करने के लिए जामा मस्जिद के सामने मैदान में आते हैं और घंटो-घंटो तक पतंगें उड़ते हैं।

मो. इक्बाल का कहना है कि 10-15 सालों में भारतीय बाजरों में आए अत्याधुनिक गैजेट्स ने तेजी से अपनी जगह बनाई हैं। इन्हीं की वजह से पतंगबाजी के रंग को फीका पड़ा। जामा मस्जिद इलाके में पतंग और मांजा की दुकान चलाने वाले उबेरुद्दीन का कहना है कि पुरानी दिल्ली में पतंगबाजों की संख्या पहले जैसी नहीं, फिर भी यहां कुछ शौकीन लोगाों ने इस खेल को जिंदा रखा हुआ है।


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