नर्सरी एडमिशन: मुस्लिम पिछड़ी जाति के लोगों से हो रहा भेदभाव

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Monday, January 20, 2014-10:38 PM

नई दिल्ली : नर्सरी एडमिशन में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने प्राईवेट स्कूल संचालकों पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। मुस्लिम पिछड़ी जाति के कुछ लोगों ने नर्सरी एडमिशन प्रक्रिया के लिए सरकार को भी आड़े हाथ लिया। उनका कहना है कि ईडब्ल्यूएस में मुस्लिम पिछड़ी जाति के लोगों को कोई फायदा नहीं है।

नईम अहमद ने बताया कि नर्सरी एडमिशन के लिए प्राईवेट स्कूल संचालक मुस्लिम अभिभावकों से उनकी शिक्षा, आर्थिक स्थिति और वेतन के बारे में पूछ रहे हैं, जो सरासर गलत है। इसी तरह मुस्लिम समुदाय में पिछड़ी जाति में आने वाले धोबी, नाई, सक्के, कुरैशी आदि जाति के लोगों का कहना है कि उन्हें नर्सरी एडमिशन में एससी/एसटी की तरह इडब्ल्यूएस कोटे का कोई फायदा नहीं मिल रहा है।

एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम के फाउंडर सुमित वोहरा का कहना है कि मुसलमानों में पिछड़ी जाति के लोगों के लिए एडमिशन प्रक्रिया में अलग से कोई छूट नहीं है। सिर्फ इसका फायदा उन्हें ही मिल सकता है, जिनकी परिवारिक आय एक लाख रुपए से कम है।

जबकि एससी/एसटी में आने वाले लोगों के लिए आय की कोई बंदिश नहीं है। एसएसी/एसटी की श्रेणी में आने वाला व्यक्ति अगर सालाना एक करोड़ रुपए भी कमाता हैं तो वह सिर्फ एससी/एसटी का सर्टिफिकेट लगाकर ईडब्ल्यूएस कोर्ट का लाभ उठा सकता है।

वहीं अभिभावक साबिर अली का कहना है कि सरकार ने पिछड़ी जाति के मुस्लमानों को ओबीसी का दर्जा देकर उनके साथ खिलवाड़ किया है। उनका कहना है कि हिन्दू धर्म में धोबी और नाई जाति के लोगों को जब एससी/एसटी का दर्जा मिला है तो फिर मुसलमानों में धोबी, नाई, कुरैशी आदि अति पिछड़ी जाति के लोगों को इस कोटे के तहत मिलने वाले लाभों से क्यों वंचित रखा गया है।


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