सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 15 दोषियों की फांसी उम्रकैद में तब्दील

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Tuesday, January 21, 2014-4:49 PM

नई दिल्ली: सजाए मौत के इंतजार में काल कोठरियों में दिन गिन रहे दोषियों को राहत दे सकने वाले एक ऐतिहासिक फैसले में उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि दया याचिका पर फैसला करने में सरकार की ओर से विलंब पर सजाए मौत उम्रकैद में बदली जा सकती है।

चंदन माफिया वीरप्पन के चार सहयोगियों समेत 15 कैदियों की सजाए मौत को उम्रकैद में बदलते हुए उच्चतम न्यायालय ने यह भी व्यवस्था दी कि मानसिक विक्षिप्तता और शिजोफेरेनिया से ग्रस्त कैदियों को सजाए मौत नहीं दी जा सकती है। 

उच्चतम न्यायालय ने खालिस्तानी आतंकवादी देविन्दरपाल सिंह भुल्लर के मामले में अपने ही फैसले को आज उलट दिया। भुल्लर के मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि दया याचिका पर फैसला करने में विलंब सजाए मौत खत्म कर उसे उम्र कैद में बदलने का कोई आधार नहीं हो सकता।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलो में उनके मानसिक रोग के आधार पर उनकी सजाए मौत उम्रकैद की सजा में बदल की जानी चाहिए। आज के फैसले का कई मामलों में निहितार्थ हो सकता है जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में सजाए मौत का इंतजार कर रहे तीन दोषियों की ओर से दायर दयायाचिका शामिल है।

उन्होंने अपनी दयायाचिका रद्द करने के राष्ट्रपति के कदम को चुनौती दी थी।   दयायाचिकाओं के निबटारे और सजाए मौत पर अमल करने के संबंध में मार्गनिर्देश तय करते हुए प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने व्यवस्था दी कि सजाए मौत दिए गए कैदियों को उनकी दयायाचिका रद्द होने की सूचना अवश्य ही दी जानी चाहिए। उन्हें सजाए मौत देने से पहले अपने परिवार के सदस्यों से मुलाकात का एक मौका अवश्य देना चाहिए। 

अदालत ने सजाए मौत का इंतजार कर रहे बंदियों समेत किसी भी बंदी को कैदे-तन्हाई में रखने को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि कारागाहों में इसकी इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।  खंडपीठ ने यह भी कहा कि दयायाचिका रद्द होने के 14 दिनों के अंदर सजाए मौत पर अमल कर लिया जाना चाहिए।



 


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