आखिर कैसे इतनी लाचार हो गई सुनंदा

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Tuesday, January 21, 2014-2:15 PM

नई दिल्ली (सतेन्द्र त्रिपाठी):  सुनंदा की जिंदादिली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रसून जोशी द्वारा महिलाओं पर लिखी एक कविता सुनंदा अक्सर गुनगुनाती रहती थी।  नारी हूं मैं, मजबूरी या लाचारी नहीं। खुद अपनी जिम्मेदारी हूं मैं, नारी हूं मैं। जिन मुद्दों पर बड़े-बड़े नेता बयान देने से बचते हैं, उन मुद्दों पर सुनंदा पुष्कर बड़ी जिंदादिली और बेबाकी से अपनी राय रखती थी, लेकिन किसी ने सोचा नही था कि इतनी जिंदादिल महिला का ऐसा अंत होगा।

आई.पी.एल. में थरूर के आरोपों को अपने सिर लेना हो या कश्मीर में धारा 370 मुद्दे पर अपनी राय रखनी हो, सुनंदा ने बिना किसी की परवाह किएअपनी राय लोगों के समक्ष रखती थी। मरने से दो दिन पहले भी उन्होंने (थरूर और उनके बीच सबुकछ ठीक है) शशि थरूर के एक बयान का खंडन किया था। सवाल उठ रहे है कि आखिर नारी शक्ति की वकालत करने वाली सुनंदा खुद कैसे इतनी लाचार हो गई। पुलिस व मामले की जांच में जुटे एस.डी.एम. को इन सवालों के जवाब ढूंढने होंगे।

तरार को लेकर आए उनके आखिर ट्वीट उनकी लाचारी को साफ दर्शा रहे है। वह किस तरह शशि थरुर के प्यार के लिए भीख मांगती हुई नजर आई। क्या अपनी तीसरी शादी टूटने के डर ने उन्हें लाचार बना दिया था। सवाल यह भी है कि जब वह थरुर से हवाई जहाज में झगड़ कर अपनी बात रख रही थी फिर अचानक उन्हें इतना गम कैसे हो गया कि उन्होंने दवा की ओवरडोज ले ली। सवाल यह भी है कि उन्होंने यह सब अनजाने में किया या फिर वह इतनी मजबूर हो गई कि उन्हें लगने लगा था कि अब मौत से ही सारे समाधान हो सकते है।

सुनंदा के मित्रों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में लगी धारा 370 का सुनंदा पुष्कर ने खुलकर विरोध किया था। गौरतलब है सुनंदा पुष्कर एक कश्मीरी महिला थी। उन्होंने तीनों शादियां कश्मीर से बाहर की थी, जिसके चलते उन्हें कश्मीर में जमीन खरीदने का अधिकार नही था। सुनंदा की मां की इच्छा थी कि अपनी जन्मभूमि कश्मीर में सुनंदा एक जमीन का टुकड़ा खरीदें लेकिन धारा 370 के चलते वे जमीन नहीं खरीद पाई।


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