काल-कोठरियों में कैद 15 दोषियों की सजा-ए-मौत, उम्रकैद में बदली

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Wednesday, January 22, 2014-12:44 AM

नई  दिल्ली : सजा-ए-मौत के इंतजार में काल-कोठरियों में दिन गिन रहे दोषियों को राहत देने वाले एक ऐतिहासिक फैसले में उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि दया याचिका पर फैसला करने में सरकार की ओर से विलंब पर सजा-ए-मौत को उम्रकैद में बदली जा सकती है।

ये निर्देश तमाम मामलों पर लागू होंगे चाहे कोई शख्स भारतीय दंड संहिता या आतंकवाद निरोधी कानून के तहत दोषी ठहराया गया हो।चंदन माफिया वीरप्पन के 4 सहयोगियों समेत 15 कैदियों की सजा-ए-मौत को उम्रकैद में बदलते हुए उच्चतम न्यायालय ने यह भी व्यवस्था दी कि मानसिक विक्षिप्तता और शिजोफेरेनिया से ग्रस्त कैदियों को सजा-ए-मौत नहीं दी जा सकती है।

खंडपीठ के इस फैसले का असर राजीव गांधी की हत्या के मामले में फांसी की सजा पाए तमिलनाडु के 3 कैदियों मुरुगन, अरूवि व संथन की सजा पर भी होगा जिनकी दया याचिका राष्ट्रपति ने 11 साल की देरी के बाद वर्ष 2011 में  खारिज  कर दी थी। इनके मामले की सुनवाई उच्चतम न्यायालय में 29 जनवरी को होनी है।

अफजल की सजा को लागू करने जैसी घटना दोबारा नहीं होगी:
इस महत्वपूर्ण फैसले से यह सुनिश्चित होगा कि अफजल गुरु की सजा को लागू करने जैसी घटना दोबारा नहीं होगी। अदालत ने कहा कि सजा को लागू करने और दोषी तथा उसके परिजनों को दया याचिका के रद्द होने की सूचना देने में 14 दिनों की अवधि का अंतर होना चाहिए। ये 14 दिन दोषी को वास्तविकता का सामना करने, ईश्वर भक्ति, इच्छाशक्ति बनाने और अपने परिवार के साथ अंतिम बार मिलने के अवसर के लिए जरूरी हैं।

कैद-ए-तन्हाई में रखना असंवैधानिक:
अदालत ने सजा-ए-मौत का इंतजार कर रहे बंदियों समेत किसी भी बंदी को कैद-ए-तन्हाई में रखने को भी असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि कारागारों में इसकी इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

मृत्युदंड पूरी तरह खत्म हो : ए.सी.एच.आर.:
 एशियन सैंटर फॉर ह्यूमन राइट्स (ए.सी.एच.आर.) के निदेशक सुहास चकमा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले से भारत मृत्युदंड समाप्त करने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ गया और भारत को अब मृत्युदंड पूरी तरह खत्म करने के बारे में सोचना चाहिए।

फैसले से राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों को राहत मिलने की उम्मीद :
एम.डी.एम.के. के नेता वाइको ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में सजा-ए-मौत का इंतजार कर रहे 3 कैदियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। इस फैसले को वाइको ने भारत में सजा-ए-मौत के खात्मे के लिए ‘रामबाण’ और ‘राह खोलने वाला’ बताते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय में 29 जनवरी को राजीव गांधी हत्याकांड पर सुनवाई होगी।

आतंकवादी भुल्लर के मामले में फैसला पलटा:
खंडपीठ ने कहा कि वह एक अन्य पीठ के फैसले से असहमत है जिसने आतंकवाद विरोधी फ्रंट के अक्ष्यक्ष मनजिंद्र सिंह बिट्टा पर हमला करने के दोषी खालिस्तानी आतंकवादी देविंद्र पाल सिंह भुल्लर की दया याचिका में अत्यधिक विलंब होने पर इस आधार पर राहत देने से इंकार कर दिया था कि वह आतंकवादी घटनाओं का दोषी है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में उनके मानसिक रोग के आधार पर उनकी सजा-ए-मौत उम्रकैद की सजा में बदल दी जानी चाहिए।

इन्हें मिल सकता है लाभ:

  • चंदन माफिया वीरप्पन के 4 सहयोगी बिलावांद्रा, सियोन, गणप्रकाश व मिसेकर मदेया जिन्होंने बारूदी सुरंग से पुलिस कर्मियों को उड़ा दिया था।
  • हरियाणा के पूर्व विधायक रालू राम पूनिया की बेटी सोनिया और संजीव जिन्होंने 2001 में अपने परिवार के 8 सदस्यों की हत्या की थी। इनमें सोनिया के माता-पिता और उसके भाई के 3 बच्चे शामिल हैं।
  • गुरमीत सिंह जिसे 1986 में अपने परिवार के 13 सदस्यों की हत्या के मामले में सजा-ए-मौत सुनाई गई थी।
  • जाफर अली जिसने अपनी पत्नी और 5 बेटियों की हत्या की थी। 
  • सुरेश और रामजी जिन्होंने अपने 5 संबंधियों की हत्या की थी।
  • प्रवीण जो कर्नाटक की जेल में और सुंदर सिंह जो उत्तराखंड की जेल में बंद है।

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