पूर्ण राज्य की दिशा में एक कदम ?

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Wednesday, January 22, 2014-2:34 PM

नई दिल्ली (अशोक शर्मा): उप राज्यपाल नजीब जंग द्वारा 2 थानाध्यक्षों को छुट्टी पर भेजे जाने के बाद दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच उत्पन्न हुई टकराव की स्थिति टल गई है। यकीनन अब रविवार को राजपथ पर गणतंत्र दिवस समारोह धूमधाम से आयोजित होगा। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने धरना समाप्त करने की घोषणा करते हुए कहा है कि हमारी मांगें आंशिक रूप से मान ली गई हैं। यह दिल्ली की जनता की जीत है और दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की दिशा में यह एक कदम है।

केंद्र सरकार या उप राज्यपाल ने यह कदम बेशक देर से उठाया है लेकिन बीच का यह रास्ता निकालना भी बहुत जरूरी था। यह कहना गलत नहीं होगा कि यदि उप राज्यपाल इस कदम को पहले उठा लेते, तो दिल्ली में ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। केजरीवाल इसे अपनी ही नहीं बल्कि दिल्ली की जनता की जीत बता रहे हैं। उप राज्यपाल यदि 3 दिन पहले ही पुलिस अधिकारियों को छुट्टी पर भेज देते, तो शायद यह स्थिति उत्पन्न होने से बच सकती थी।

याद रहे कि निर्भया गैंगरेप कांड होने के बाद राजपथ पर अपार भीड़ के जुट जाने के बाद तत्कालीन उप राज्यपाल तेजेन्द्र खन्ना की हालात की नजाकत को देखते हुए जांच का आदेश देने के बाद दिल्ली पुलिस के 2 सहायक आयुक्तों को निलम्बित कर दिया था। बेशक जांच के बाद वे दोनों सहायक पुलिस आयुक्त ड्यूटी पर लौट  आए थे। इस बार ऐसा नहीं हुआ और यदि यह कदम पहले ही उठ गया होता, तो रेल भवन पर धरना और प्रदर्शन की वजह से दिल्ली की लाखों लोगों को परेशानी नहीं उठानी पड़ती।

मुख्यमंत्री केजरीवाल का अब कहना है कि उपराज्यपाल से बातचीत कर अब दिल्ली पुलिस की जवाबदेही तय की जाएगी। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाया जाएगा। आप ने ही नहीं बल्कि कांग्रेस और भाजपा के चुनाव घोषणापत्र में दिल्ली की जनता से यह वादा भी किया गया है। आप के नेताओं का कहना है यदि दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार के प्रति जवाबदेह हो जाएगी, तो आम जनता को काफी राहत मिलेगी। लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी बहुत जरूरी है।

क्या केंद्र सरकार यह कदम उठाकर इसका श्रेय दिल्ली की केजरीवाल सरकार को लेने देगी? सवाल यह है कि जब दिल्ली के पुलिस आयुक्त की हर साल वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट दिल्ली के मुख्यमंत्री की ही सलाह पर दिल्ली के मुख्य सचिव द्वारा तैयार कर सरकार के पास भेजी जाती है। इतना ही नहीं दिल्ली पुलिस का नॉन प्लान बजट मुख्यमंत्री द्वारा ही स्वीकृत किया जाता है, तो क्या दिल्ली पुलिस की जवाबदेही दिल्ली सरकार के प्रति तय नहीं की जा सकती?

सिसोदिया ने पहले जताए थे इरादे

दिल्ली विधानसभा चुनाव से पूर्व आप के नेता और वर्तमान में दिल्ली के मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा था कि कांग्रेस और भाजपा के नेता दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए कभी गंभीर नहीं हुए लेकिन दिल्ली की सत्ता संभालने के बाद आप अपने इस वादे को पूरा करेगी। सिसोदिया ने नवोदय टाइम्स के साथ चुनाव से पहले हुई एक बातचीत में दो-टूक कहा था कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा हर तरीके से मिलना ही चाहिए।

आप की सरकार बनने पर हम विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर उसे केंद्र सरकार के पास भेजेंगे। यदि केंद्र सरकार ने इस मांग को 6 महीने में पूरा नहीं किया तो अरविंद केजरीवाल दिल्ली की जनता के साथ प्रधानमंत्री आवास के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल इस मांग को पूरा करवा पाने के लिए क्या रणनीति अपनाते हैं और क्या वह केंद्र सरकार से इस मांग को कैसे पूरा करवा पाएंगे?

 


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