उत्तराखंड विधानसभा में लोकायुक्त विधेयक पारित

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Wednesday, January 22, 2014-4:35 PM

देहरादून: विपक्ष की नारेबाजी और बहिर्गमन के बीच उत्तराखंड विधानसभा में कल शाम लोकायुक्त विधेयक 2014 को पारित कर अनिश्चित काल के लिये स्थगित हो गयी। इसके पारित होते ही पिछली खंडूरी सरकार का लोकायुक्त विधेयक खारिज हो गया।  संसद द्वारा लोकपाल विधेयक पारित करने के बाद उसी के अनुरुप अपना नया विधेयक पारित करने वाली उत्तराखंड की विधानसभा देश में इस मामले में अग्रणी बन गई है। जनवरी में ही यह कानून अस्तित्व में आ जायेगा। नये लोकायुक्त की जांच के दायरे में मुख्यमंत्री, विधायक और मुख्य सचिव के अलावा अन्य सरकारी कर्मचारी भी आ जायेंगे। विधानसभा ने कल लोकायुक्त विधेयक 2014 पारित कर पहली बार बुलाये गये विशेष सत्र का अपना दायित्व पूरा कर दिया। यह विधेयक विपक्षी भाजपा सदस्यों के विरोध के बावजूद उनके बहिर्गमन के बीच सरकार ने ध्वनिमत से पारित कराया।

इसके साथ ही विधानसभा ने सेवा का अधिकार विधेयक भी मंगलवार को ही पारित कर गेंद अब राज्यपाल के पाले में डाल दी है। राजभवन से भी इस विधयेक को तत्काल मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इस तरह उत्तराखंड संसद की भावना के अनुरप लोकायुक्त विधेयक पास कराने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है। इस विधेयक को पारित कराने के लिये बुलाये गये इस विशेष सत्र में ही पिछली भाजपा सरकार द्वारा विधानसभा से पारित कराये गये लोकायुक्त विधेयक 2011 के 27 वें अधिनियम बनने की घोषणा की गयी थी और इसी सत्र में बिना लागू हुये उस कानून को खारिज कर दिया गया है। राज्य के इतिहास में यह पहला मौका था जबकि विधानसभा का विशेष सत्र आहूत किया गया और यह भी पहला ही मौका था जबकि जिस सत्र में विधेयक के कानून बनने की घोषणा की गयी उसी सत्र में वह निरस्त भी हो गया।

पिछले लोकायुक्त को राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गयी थी। लोकायुक्त विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अधीन अपराधों की जांच के साथ-साथ व्याप्त भ्रष्टाचार की त्वरित जांच और अपराधियों को अभियोजित करने. लोकहित के विभिन्न शिकायतों को दूर करने और शिकायतकर्ताओं को संरक्षण प्रदान करने के लिए स्वतंत्र प्राधिकरण स्थापित करने के लिए इस लोकायुक्त बिल को लाया गया है। उन्होंने कहा कि सशक्त लोकायुक्त के गठन, त्वरित जांच, त्वरित अभियोजन. लोकहितों की शिकायतों के निराकरण और शिकायतकर्ताओं के संरक्षण संबंधी प्रावधान इसमें किए गए है।


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