लोकपाल विधेयक के बाद अपने अधिकारों की बाबत CBI ने उठाए सवाल

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Wednesday, January 22, 2014-7:52 PM

नई दिल्ली: लोकपाल अधिनियम में कुछ ‘‘विसंगतियों एवं कानूनी जटिलताओं’’ की ओर इशारा करते हुए सीबीआई ने सवाल किए हैं कि यदि उसके किसी अधिकारी को भ्रष्टाचार या सबूतों से छेड़छाड़ करने का दोषी पाया जाता है तो क्या पूरी जांच एजेंसी से सारे अधिकार छीन लिए जाएंगे। लोकपाल अधिनियम और संशोधित केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम में ‘‘विसंगतियों’’ पर प्रकाश डालते हुए सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने जांच एजेंसी के कामकाज के सिलसिले में केंद्र सरकार से स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया है।   

सिन्हा ने कहा कि किसी तरह की मुकदमेबाजी से बचने के लिए इनकी विस्तृत पड़ताल की जरूरत है वरना भ्रष्टाचार के खिलाफ सारी कोशिशें कमजोर पड़ जाएंगी। एजेंसी सूत्रों ने कहा कि कार्मिक विभाग के सचिव एस के सरकार को भेजे गये पांच पन्नों के पत्र में सिन्हा ने लोकपाल अधिनियम की धारा 38 सहित कुछ और विसंगतियों का हवाला दिया। लोकपाल अधिनियम की धारा 38 में प्रावधान है कि भ्रष्टाचार के मामलों में यदि लोकपाल या इससे जुड़ी जांच एजेंसी के किसी अधिकारी या कर्मी द्वारा सबूत मिटाने की आशंका है या वह किसी भी तरह से सबूतों से छेड़छाड़ करता या करती है या गवाहों को प्रभावित करता या करती है तो ऐसे में ‘‘लोकपाल से जुड़ी उस एजेंसी से सभी अधिकार छीन लिए जाएंगे।’’

सीबीआई निदेशक ने कहा, इस बाबत स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है कि क्या किसी अधिकारी की गलती के लिए पूरी एजेंसी से उसके सारे अधिकार और जिम्मेदारियां छीन ली जाएंगी। सिन्हा ने लोकपाल अधिनियम की धारा 46 की उस उपधारा का भी हवाला दिया जिसमें फर्जी शिकायतें दर्ज कराने वालों के लिये सजा का प्रावधान हैं। सीबीआई निदेशक ने कहा कि यह प्रक्रिया तभी शुरू की जानी चाहिए जब वह व्यक्ति, जिसके खिलाफ शिकायत की गयी थी, सक्षम अदालत का रूख करे।

उन्होंने कहा, यह सुझाव दिया जाता है कि यदि सीबीआई के खिलाफ गलत या फर्जी शिकायतें दर्ज करायी जाए तो सीबीआई निदेशक के पास अदालत में शिकायत करने का अधिकार होना चाहिए। पिछले महीने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पारित हुए लोकपाल विधेयक को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने एक जनवरी 2014 को अपनी मंजूरी दे दी थी। सीबीआई निदेशक ने धारा 25 का भी हवाला दिया जिसके तहत लोकपाल को सीबीआई पर अधीक्षण का अधिकार होगा और वह उन मामलों में एजेंसी को निर्देश भी देगा जिनमें प्रारंभिक जांच या मामले की तफ्तीश सीबीआई को सौंपी गई होगी।

अपने पत्र में सिन्हा ने कहा, धारा के प्रावधानों की पृष्ठभूमि में यह स्पष्ट नहीं है कि किस संदर्भ या किन क्षेत्रों में लोकपाल जांच एजेंसी को ऐसे निर्देश दे सकता है। सीबीआई निदेशक ने ऐसी स्थिति का भी जिक्र किया जिसमें एक ही शिकायत लोकपाल और सीवीसी दोनों को दी जाए और दोनों सीबीआई को निर्देश जारी कर दें। सिन्हा ने कहा, दोनों में से किस निर्देश को वरीयता मिलेगी ? लोकपाल विधेयक का प्रावधान इस सवाल का जवाब नहीं देता।


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