दिल्ली महिला आयोग से समन अभी नहीं मिला: सोमनाथ भारती

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Thursday, January 23, 2014-2:44 AM

नई दिल्ली: अफ्रीकी मूल की महिलाओं के खिलाफ मध्य रात्रि में की गई छापेमारी की कथित तौर पर अगुवाई करने के बाद आलोचनाओं का सामना कर रहे दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती ने आज कहा कि दिल्ली महिला आयोग से उन्हें अभी कोई नोटिस नहीं मिला है। भारती ने पत्रकारों से बचने का प्रयास करते हुए सिर्फ इतना कहा, मुझे महिला आयोग से अभी नोटिस नहीं मिला है।

इससे पहले दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष बरखा सिंह ने कहा, ‘‘हमने उनसे (भारती) कल उपस्थित होने के लिए कहा था, लेकिन वह नहीं आए। हम संबंधित एसएचओ के जरिए फिर सम्मन भेज रहे हैं। अगर वह फिर नहीं आते हैं तो हम उप राज्यपाल और पुलिस आयुक्त से प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कहेंगे।

सोमनाथ भारती के बचाव में उतरी आम आदमी पार्टी

नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के खिड़की एक्सटेंशन में आधी रात को की गयी छापेमारी के मामले में दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती का बचाव करते हुए आम आदमी पार्टी ने आज कहा कि एक पीड़िता ने कथित तौर पर हमलावरों की अगुवाई करने वाले शख्स के रूप में भारती की पहचान भले की हो, पर इस बात का पता लगाने के लिए न्यायिक जांच अभी चल ही रही है कि असल में समूह ने किया क्या था।

‘आप’ के प्रवक्ता दिलीप पांडेय ने यहां संवाददाताओं से कहा, बयान का संदर्भ समझना काफी अहम है। पीड़िता ने कहा है कि उन्होंने भारती की पहचान की है पर उस समूह ने क्या किया, जिसकी अगुवाई कथित तौर पर सोमनाथ कर रहे थे, इसकी जांच अभी चल ही रही है। पांडेय ने कहा, तथ्यों का पता लगाने के लिए न्यायपालिका मामले की जांच कर रही है और वह जो भी कहेगी, हम उसका पालन करेंगे। मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराकर एक पीड़िता ने भारती की पहचान उस शख्स के तौर पर की है जो समूह की अगुवाई करते हुए उसके घर में घुस आया और उन पर हमला किया।

युगांडा की नागरिक इस महिला ने कहा, भारती की अगुवाई में कुछ भारतीयों ने बुधवार की रात हम पर हमला किया, हमें प्रताडि़त किया गया, मारा गया। उनके पास डंडे थे। उन्होंने कहा कि हमें देश छोड़ देना चाहिए वरना वे सबको मार डालेंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या जांच पूरी होने तक भारती पद से इस्तीफा देंगे, क्योंकि कर्तव्य में ढिलाई बरतने के आरोपी पुलिसकर्मियों को लेकर ‘आप’ के नेताओं ने ऐसी ही मांग की थी, इस पर पांडेय ने कहा कि इस्तीफा देने का सवाल ही पैदा नहीं होता। पांडेय ने कहा, एक कानून मंत्री के तौर पर वह जांच प्रभावित करने की स्थिति में ही नहीं हैं। न तो उनका न्यायपालिका पर कोई नियंत्रण है। आरोपी एसएचओ सबूतों को प्रभावित करने की स्थिति में थे इसलिए हमने उनके निलंबन या तबादले की मांग की थी।


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