आप से टिकट मांगने में पीछे नहीं हैं विकलांग

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Thursday, January 23, 2014-1:41 PM

नई दिल्ली/ गाजियाबाद (शशिकांत वत्स): आम आदमी पार्टी की लहर में न सिर्फ आम आदमी, बल्कि विकलांग भी आप के जरिए संसद में दस्तक देना चाहते हैं। जोश और जज्बे से भरे कई विकलांग शनिवार को कौशांबी स्थित आप आदमी पार्टी के दफ्तर पर लोकसभा प्रत्याशी के लिए आवेदन करने के लिए पहुंचे।

टिकट की दावेदारी करने वाले यह विकलांग ट्राई साइकिल और स्कूटी से पार्टी दफ्तर पहुंचे थे। पार्टी दफ्तर पर नवोदय टाइम्स से बातचीत के दौरान विकलांगों ने खुलासा किया कि वह आखिर क्यों पार्टी के चुनाव पर टिकट लेना चाहते हैं। अंतर्राष्ट्रीय पैरालिंपिक टेबिल टैनिस खिलाड़ी 31 वर्षीय सुवर्णा का दावा है कि वह कॉमनवैल्थ गेम्स-2010 में हिस्सा ले चुकी हैं।

वह विकलांग संघ की उपाध्यक्ष भी हैं। सुवर्णा अपनी ट्राई साइकिल से पार्टी दफ्तर पहुंची थीं। वह कई टी.वी. चैनल में सिटीजन जर्नलिस्ट के तौर पर विकलांगों के अधिकारों के लिए लड़ती रही हैं तथा उनकी जागरूकता के लिए भी काम किया है। उन्हें खेल के क्षेत्र में कई राष्ट्रीय व अंतरर्राष्ट्रीय अवार्ड से नवाज जा चुका है।

बैंकाक में हुई इवैंट टीम के लिए उन्हें गोल्ड मैडल व सिंगल इवैंट के लिए कांस्य पदक मिल चुका है। इतना ही नहीं सुवर्णा को नैशनल वूमेन एक्सीलेंस अवार्ड से भी मिल चुका है। सुवर्णा महाराष्ट्र की नागपुर लोकसभा सीट से आप पार्टी का टिकट की दावेदार हैं। चुनाव लडऩे के लिए उनका दावा है कि वह नागपुर में जन्मी हैं, जिसके चलते क्षेत्र व क्षेत्रवासियों से पूरी तरह वाकिफ है।

चुनाव लडऩे की वजह का जवाब देते हुए सुवर्णा ने कहा कि देश में करोड़ों विकलांग हैं, लेकिन उनकी आवाज उठाने वाला कोई नहीं है। उनकी समस्याओं को विधानसभा व लोकसभा में बेहतर ढंग से उठाने के लिए ही वह चुनाव लडऩा चाहती हैं क्योंकि उनका समाज बहुत पिछड़ा हुआ है और देश के विकलांग यह सोचते रहते हैं कि उनकी समस्याओं को कौन उठाएगा। संसद में उनकी बात उठाने के लिए किसी के पास समय नहीं है।

जब उनसे पूछा गया कि आप को ही टिकट क्यों दिया जाए तो उन्होंने कहा कि वह विकलांगों के उत्थान के लिए समय-समय पर कार्य करती रही हैं। मंत्रियों के यहां पर धरने-प्रदर्शन किए हैं। उनके अंदर विकलांगों के लिए लडऩे का जज्बा है और अगर आप पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वह अन्य पार्टी से चुनाव नहीं लड़ेंगी।

सुवर्णा के साथ ही उनके 32 वर्षीय पति प्रदीप राज भी दिल्ली की उत्तर पूर्वी लोकसभा सीट से टिकट मांगने आप पार्टी दफ्तर पहुंचे थे। शाहदरा बलबीर निवासी प्रदीप राज भी विकलांग है, और अंतर्राष्ट्रीय पैरालिंपिक खिलाड़ी रह चुके हैं। फिलहाल वह विकलांगों को टेबिल-टैनिस की ट्रेनिंग देने का काम कर रहे हैं।

विकलांगों के अधिकारों के लिए एक संस्था भी चला रहे हैं। प्रदीप का टिकट की दावेदारी के बारे में कहना है कि देश में 7 करोड़ विकलांग है लेकिन उनकी आवाज उठाने वाला कोई नहीं है। अगर वह संसद पहुंचे तो विकलांगों की आवाज बुलंद करेंगे और अगर आप पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो अन्य पार्टी से चुनाव लडऩे का उनमें माद्दा नहीं है, क्योंकि अन्य पार्टियों से टिकट खरीदने की उनकी हैसियत नहीं है। प्रदीप का कहना है कि विकलांगों के अधिकारों के लिए जमीनी तौर व ऑनलाइन कैंपेन चला चुके हैं और उनको जीत भी दिलाई है।

उत्तर पूर्वी लोकसभा सीट पर दावेदारी ठोकने भजनपुरा निवासी गुरमीत सिंह आजाद अपनी स्कूटी से आप पार्टी कार्यालय पहुंचे थे। गुरमीत का मानना है कि जब तक राजनीति से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा, तब तक देश व आम आदमी का विकास संभव नहीं है। उनका कहना था कि अगर वह सांसद बनते है तो बुजुर्गों व कमजोर तबके के लोगों और रोजमर्रा के महिलाओं के मुद्दों को उठाएंगे।

स्वराज पर पूछे एक सवाल का जवाब देते हुए गुरमीत का कहना है कि किताब में लिखी हर पंक्ति से वह सरोकार रखते हैं।  वह जिस एन.जी.ओ. के साथ जुड़े हुए हैं, उसमें स्वराज के अनुसार ही कार्य कर रहे हैं। गुरमीत का कहना है कि हमारे देश में स्वराज के बारे में अन्ना आंदोलन से पहले कभी नहीं सोचा गया था।


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