बदसूरती छिप नहीं सकती लाखों के फूलों से

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Thursday, January 23, 2014-2:16 PM

नई दिल्ली : नगर निगम के स्कूलों के बेंच भले ही न हों, छात्रों को सर्दियों में स्वेटर मिले या न मिले, लेकिन निगम अधिकारियों और नेताओं के कमरों में रोजाना फ्रेश फूलों के गुलदस्ते जरूर आने चाहिए। इन गुलदस्तों पर निगम का प्रति माह लगभग तीन लाख रुपए खर्च होता है।

विशेषकर अधिकारियों की इस फिजूलखर्ची पर अब लगाम लगेगी। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की स्थाई समिति ने रोजाना आने वाले गुलदस्तों पर रोक लगाते हुए गुलदस्तों की खरीद पर खर्च की गई राशी की जांच करने के आदेश भी दिए हैं। गौरतलब है नगर निगम में आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त, निगम सचिव, सभी नेताओं समेत हर विभाग के निदेशकों और उप-निदेशकों के कमरों में रोजाना फ्रेश फूलों के गुलदस्ते लगाए जाते हैं।

इन गुलदस्तों पर होने वाले खर्चे को लेकर निगम में नेता विपक्ष फरहाद सूरी ने पब्लिक मनी का दुरुपयोग कर ऑफिस में प्रतिदिन गुलदस्ता मंगाए जाने को लेकर विरोध जताया। सूरी का कहना था कि निगम के अफसर और नेता पब्लिक मनी का दुरुपयोग कर गुलदस्ता मंगा रहे हैं। 

निगम के सभी विभागों के प्रमुखों और सभी नेताओं के कमरे में गुलदस्ता प्रतिदिन बदला जाता है जिसपर निगम के लाखों रुपए बर्बाद हो रहे हैं। जबकि इसकी कोई आवश्यकता ही नहीं है। विपक्ष का नेता होने के नाते मेरे ऑफिस में भी गुलदस्ता प्रतिदिन भेजा जाता था, जिस पर मैंने रोक लगा दी है।

विपक्ष द्वारा मामला उठाए जाने के बाद स्थायी समिति ने गुलदस्ते पर रोक लगा दी है। साथ ही इसकी आवश्यकता को लेकर अधिकारियों से जवाब भी मांगा गया है। बताते चलें कि निगम मुख्यालय सिविक सेंटर में निगम के सभी विभागों के प्रमुख और निगम की विभिन्न कमेटियों के नेता बैठते हैं। नेताओं और अफसरों के आने या न आने दोनों ही स्थिति में गुलदस्ता ऑफिस की टेबल पर पहुंच जाता है। निगम के इन्हीं गुलदस्तों से प्रतिमाह लाखों रुपए बर्बाद किए जा रहे हैं। यह हॉल सिर्फ  दक्षिणी दिल्ली नगर निगम का नहीं है बल्कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम का भी है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के नेता और अफसर भी पब्लिक मनी का दुरुपयोग कर रहे हैं।  


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