राजस्थान विधानसभा में उठा विवाद

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Thursday, January 23, 2014-6:20 PM

जयपुर: राजस्थान विधानसभा में आज राज्यपाल के अभिभाषण को पढ़ा हुआ माने जाने के सवाल पर अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने कहा कि सदन की सहमति पर ही अभिभाषण को पढ़ा हुआ माना गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राव राजेन्द्र सिंह द्वारा राज्यपाल मारग्रेट अल्वा के अभिभाषण को पढ़ा हुआ माने जाने पर एतराज करते हुए संविधान की धारा 176 के तहत अभिभाषण को पढ़ा हुआ नहीं माना जा सकता। इसके बाद कांग्रेस के प्रद्युम्न सिंह ने राव की आपत्ति को उचित बताते हुए कहा हम संविधान का उल्लंघन नहीं कर सकते तथा भविष्य के लिए इस बारे में सर्वदलीय बैठक बुलाकर कोई निर्णय लिया जाए।

मेघवाल ने प्रद्युम्न सिंह की राय पर सहमति जताते हुए कहा कि राज्यपाल की यह मंशा थी कि अभिभाषण को पढ़ा हुआ मान लिया जाए जिस पर सदन की सहमति थी। इससे पहले नेशनल पीपुल्स पार्टी के डा. किरोडी लाल मीणा ने कहा हमें अभिभाषण समझ में आ रहा था लेकिन पढ़ा हुआ मान लिया गया जिससे हमारे अधिकारों का हनन हुआ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अभिभाषण को पढ़ा हुआ मानने की सदन से सहमति नहीं ली गई बल्कि संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र सिंह राठौड़ के कहने पर ही ऐसा हुआ।

राव ने कहा कि परम्परा के आधार पर सदस्यों के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। राठौड़ ने कहा कि मंत्रिमंडल के अनुमोदन के बाद अभिभाषण सरकार का नीति पत्र होता है। सदन ने भी अभिभाषण को स्वीकार किया है इसमें कोई वाद विवाद नहीं होना चाहिए। पूर्व की अध्यक्ष की व्यवस्था को देखा जाए तो पढ़ा हुआ माने जाने की परम्परा मिल जाएगी। सत्ता पक्ष के सुरेन्द्र गोयल का कहना था कि अभिभाषण को पढ़ा हुआ मानने की पहले भी परम्परा रही हैं।


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