नए लोकपाल अधिनियम में हैं कई विसंगतियां : सीबीआई

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Thursday, January 23, 2014-8:38 PM

नई दिल्ली : क्या लोकपाल को विदेश में जांच करने का अधिकार है? यह सवाल सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने सरकार से पूछा है। उन्होंने संसद द्वारा हाल में पारित लोकपाल और लोकायुक्त कानून में विभिन्न विसंगतियों के बारे में जानना चाहा है।

कार्मिक विभाग के सचिव एस. के. सरकार को भेजे पांच पन्नों के पत्र में सिन्हा ने कहा कि  लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम 2013 की धारा 36 के मुताबिक प्रारंभिक जांच करने वाला लोकपाल अधिकारी स्थानीय अदालत से संपर्क कर सकता है और यदि किसी दूसरे राज्य से संबंध तो स्थानीय अदालत से साक्ष्य उपलब्ध कराने के बारे में स्थानीय अदालत से आदेश प्राप्त कर सकता है।

अधिनियम में कहा गया है कि विशेष अदालत इस बात पर संतुष्ट होने पर कि इस अधिनियम के तहत किसी अपराध में प्रारंभिक जांच की जरूरत है तो वह अदालत या संबंधित सक्षम अधिकारी को आग्रह पत्र जारी कर सकता है।

बहरहाल सीबीआई निदेशक ने एक सवाल उठाते हुए कहा कि इस धारा से स्पष्ट नहीं है कि क्या इसमें विदेशों को शामिल किया गया है और क्या संधि एवं समझौते के प्रावधानों का प्रयोग कर इस तरह के आग्रह विदेशों को भेजे जा सकते हैं।

सिन्हा ने संशोधित सीवीसी अधिनियम में कुछ विसंगतियों की ओर इशारा किया और संशोधित धारा आठ का जिक्र किया जिसमें एजेंसी केंद्रीय सतर्कता आयोग से सलाह लिए बगैर केंद्र के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर नहीं कर सकेगी।

सीबीआई निदेशक ने कहा कि पुलिस अधिकारी द्वारा जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों पर मुकदमा चलाने के बारे में एक गैर पुलिस अधिकारी द्वारा राय बनाने का प्रावधान दंड प्रक्रिया संहिता और शीर्ष अदालत की न्यायिक व्यवस्थाओं के विपरीत है। सिन्हा ने कहा कि अगर किसी मामले में सीबीआई के खिलाफ गलत शिकायत दर्ज कराई जाती है तो सीबीआई निदेशक को अदालत में शिकायत करने की अनुमति दी जानी चाहिए ।
 


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