मुसलमानों के लिए सफेद हाथी की तरह है ओबीसी कोटा : इशरत

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Thursday, January 23, 2014-11:18 PM

नई दिल्ली : ओ.बी.सी. कोटा मुसलमानों के लिए सफेद हाथी की तरह है। जो केवल दिखाने के लिए है, लेकिन उसका फायदा उन्हें नहीं मिल पाता। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की महासचिव इशरत जहां का कहना है कि राजधानी दिल्ली में अन्य पिछड़ा वर्ग के दायरे में आने वाले मुसलमान ओ.बी.सी. कोटा के तहत मिलने वाली सुविधाओं से लगभग महरूम हैं।

ओ.बी.सी. का प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए कठिन प्रक्रिया और मुसलमानों में जागरूकता की कमी मुख्य वजह है। ओ.बी.सी. का प्रमाण पत्र उसी व्यक्ति का बन सकता है, जिसके पास दिल्ली में रहने से संबंधित 21 साल पुराना कोई भी दस्तावेज हो।

दिल्ली में करीब 20 फीसदी आबादी मुसलमानों की है। जिसमें 90 फीसदी मुसलमान ओ.बी.सी. के दायरे में आते हैं लेकिन 5 फीसदी तक भी ओ.बी.सी. सर्टिफिकेट नहीं बन सके हैं जिस कारण ज्यादातर मुसलमान शिक्षा, नौकरियों, व अन्य क्षेत्रों में मिलने वाली विशेष छूट से महरूम हैं।

जागरूकता की कमी : ओ.बी.सी. कोटे का लाभ उठाने में मुसलमानों के पिछड़े होने का सबसे बड़ा कारण जागरूकता का आभाव है। ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम की ओ.बी.सी. का प्रमाण पत्र उनके तथा उनके बच्चों को शिक्षा से लेकर नौकरी मिलने तक कितना लाभकारी है।


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