धरने के बाद ‘आप’ पर बंटी आम लोगों की राय

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Thursday, January 23, 2014-11:59 PM

नई दिल्ली : केजरीवाल का धरना भले ही खत्म हो गया हो लेकिन दुकानों, चौराहों और नुक्कड़ों पर चर्चा जारी है। शायद तब तक जब केजरीवाल लोगों का ध्यान खींचने के लिए नई चाल नहीं चलते लेकिन उनके हालिया धरने के बाद क्या उनकी नेगेटिव छवि बनी है। इस सवाल पर लोगों की बंटी हुई राय है। कई लोग धरने को सही मानते हैं।

मुनिरका में रहने वाले विवेक कुमार का कहना है कि धरने से एक फायदा हुआ है कि लोगों में पुलिस के प्रति सजग हुए हैं। हालांकि वे कहते हैं कि धरने से लोगों की जिंदगी पर असर पड़ा और इसके लिए केंद्र सरकार भी बराबर जिम्मेदार है।

वहीं, वसंत विहार में रहने वाली शिवांगी का कहना है कि धरना करना गलत नहीं है लेकिन सरकार आगे क्या करती है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सी.एम. को भी आम आदमी के अधिकार हासिल हैं और धरना कर सकते हैं लेकिन राहुल राय कहते हैं कि आम आदमी पार्टी अगर ऐसे ही धरना करती रही तो नुक्सान होगा।

राहुल का कहना है कि सोमनाथ वाले मामले में केजरीवाल को बोलना होगा। अनिल कुमार का कहना है कि धरने से एक संकेत गया है कि लॉ एंड ऑर्डर में कुछ होता है तो दिल्ली सरकार उसके लिए जिम्मेदार नहीं होगी लेकिन एक मतलब यह भी है कि दिल्ली सराकार दूसरे मुद्दे से ध्यान भटका रही है। जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अन्य मुद्दे पर दिल्ली सरकार काम कर सकती है।

मुनिरका में होटल चलाने वाले शरद कहते हैं कि केजरीवाल कोई काम तो कर नहीं रहे हैं सिर्फ धरने की राजनीति कर रहे हैं। हालांकि शरद ने पिछले चुनाव में आप को वोट नहीं किया था लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि केजरीवाल सरकार कुछ अच्छा करेगी। सुधीर कुमार कहते हैं कि केजरीवाल के धरने की तरह ही अलग-अलग पार्टी धरना करना शुरू कर दे तो देश का क्या हाल होगा।


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