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दिल्ली की बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट पर रोक नहीं

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Friday, January 24, 2014-3:18 PM

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज राजधानी में बिजली की वितरण करने वाली निजी कम्पनियों के खाते की जांच नियंत्रक तथा महालेखा परीक्षक .कैग. से करने के सरकार के आदेश पर ही कैग को निर्देश दिया कि वह याचिका की सुनवाई पूरी होने तक अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं प्रस्तुत करें1 न्यायालय ने बिजली कम्पनियों को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। 

बिजली कम्पनियों की ओर से कहा गया कि आडिट का आदेश राजनीतिक उद्देश्य से दुर्भावना के चलते दिया गया है और आदेश जारी करने से पहले (डिस्काम) को सुना नहीं गया1  2003 के बिजली कानून के अनुसार कैग से जांच का आदेश जारी करने से पहले उपराज्यपाल को सरकार के साथ फाईल की कार्रवाई पूरी करनी चाहिए थी। बिजली कम्पनियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि दिल्ली सरकार ने इस आदेश को जारी करते समय पूरे मामले पर गहराई के साथ विचार नहीं किया।

उन्होंने इस आदेश को शेखचिल्ली आदेश करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर कैग को एक निजी कम्पनी के खाते की जांच की अनुमति दी जाती है तो फिर सभी निजी कमपनियों और व्यक्ति उसकी जांच के दायरे में आ जायेंगे। दिल्ली सरकार की पैरवी एडवोकेट प्रशांत भूषण ने की1 उन्होंने कहा कि खातों में हेराफेरी के चलते सार्वजनिक हित में कैग से लेखा परीक्षा करना आवश्यक हो गया था।

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