दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ा बेचे जा रहे फॉर्म

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Friday, January 24, 2014-4:07 PM

 नई दिल्ली (रोहित राय): नर्सरी दाखिले के लिए उप राज्यपाल डॉ. नजीब जंग द्वारा बनाए गए नए दिशा-निर्देशा लागू होने के बाद भी निजी स्कूल प्रबंधनों की मनमानी जारी है। मनमाने दामों पर अभिभावकों को प्रॉसपैक्टस खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। दिशा-निर्देशों में दिखाई दे रही सख्ती जमीनी स्तर पर अपना असर नहीं दिखा पा रही है। 

यही वजह है कि हर साल की तरह इस साल भी नर्सरी के दाखिले फॉर्म के साथ अभिभावकों के हाथों में महंगे प्रॉसपैक्टस जबरन थमाए जा रहे हैं। प्रॉसपैक्टस को लेकर सबसे ज्यादा धांधली पश्चिम दिल्ली के स्कूल कर रहे हैं। नए दिशा-निर्देशों के तहत कोई भी स्कूल प्रबंधन किसी अभिभावक को प्रॉसपैक्टस खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। इसके अलावा दाखिले का आवेदन फॉर्म 25 रुपए से ज्यादा की कीमत पर नहीं बेचा जा सकता। 

जनकपुरी स्थित सुमेर मल जैन पब्लिक स्कूल में मनमाने दाम पर प्रॉसपैक्टस बेचे जा रहे हैं। वीरवार को अपनी बेटी के दाखिले के लिए फॉर्म खरीदने आए अभिभावक अशोक भसीन ने शिकायत की कि स्कूल प्रबंधन ने उन्हें प्रॉसपैक्टस खरीदने के लिए मजबूर कर दिया। स्कूल प्रबंधन ने बिना प्रॉसपैक्टस के दाखिला फॉर्म देने से मना कर दिया और कहा कि अगर फॉर्म चाहिए तो 50 रुपए का प्रॉसपैक्टस खरीदना जरूरी है। इसी तरह विकासपुरी स्थित होली इनोसेंट पब्लिक स्कूल में भी प्रॉसपैक्टस को लेकर स्कूल की मनमानी जारी है, जिससे अभिभावक परेशान हैं। 

यहां फॉर्म खरीदने आए अभिभावक सुमित अग्रवाल भी स्कूल प्रबंधन के नियमों से नाराज दिखे। सुमित ने शिकायत की कि उन्होंने जब 25 रुपए का दाखिला फॉर्म मांगा तो स्कूल की ओर से बताया गया कि अगर दाखिले के लिए फॉर्म चाहिए तो 100 रुपए का प्रॉसपैक्टस खरीदना पड़ेगा। बिना प्रॉसपैक्टस के फॉर्म नहीं दिया जाएगा। सुमित ने बताया कि स्कूल की एक शिक्षिका ने उन्हें फॉर्म भरकर अपने बच्चे की सीट पक्की करने को भी कहा।

 शिक्षिका की ओर से कहा गया कि अगर वो शुक्रवार को फॉर्म भरकर स्कूल की एक महीने की फीस जमा करवा देते हैं तो उनके बच्चे की सीट नर्सरी में अभी से ही पक्की हो जाएगी। स्कूलों की मनमानी का यह कोई पहला मामला नहीं है। बुधवार को नर्सरी दाखिले के लिए बनाए गए दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाने संबंधी शिक्षा निदेशालय की हैल्पलाइन पर कुल 1410 शिकायतें पहुंची थी। इनमें से करीब डेढ़ सौ शिकायतें मामूली उल्लंघन की थी। 

इसके अलावा बाकी शिकायतों में प्रमुख शिकायत प्रॉसपेक्टस खरीदने के लिए मजबूर करना और दाखिला संबंधी जानकारी सही तरीके से नहीं देना शामिल है। अभिभावकों को जबर्दस्ती प्रॉसपैक्टस खरीदने के लिए बाध्य करने पर जब स्कूल प्रबंधनों से बात की गई तो कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं हुआ।    


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