अखिलेश के मंत्रिमंडल विस्तार में दिखा वोट बैंक का साफ गणित

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Saturday, January 25, 2014-10:11 AM

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव मंत्रिमंडल के छठे विस्तार में वोट बैंक की गणित के साथ ही मुजफ्फरनगर दंगों के साये की स्पष्ट छाप दिखी। मंत्री के रुप में पांच मंत्रियों ने शपथ ली जिसमें चार मुस्लिम हैं। पांचवें मंत्री को गत 18 जनवरी को ही शपथ लेना था लेकिन संसदीय कार्यमंत्री मोहम्मद आजम खां के नेतृत्व में विदेश गये विधायकों के दल में शामिल होने के कारण शिवाकांत ओझा उस दिन शपथ नहीं ले सके थे। शिवाकांत ओझा के अतिरिक्त शपथ लेने वालों में शाहिद मंजूर, महबूब अली और इकबाल महमूद को राज्यमंत्री से प्रोन्नत कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया है जबकि यासिर शाह ने राज्यमंत्री के रुप में शपथ ली। शाह श्रम मंत्री रहे वकार अहमद शाह के पुत्र हैं। वकार अहमद शाह को गम्भीर बीमारी की वजह से मुख्यमंत्री ने उन्हें कार्यमुक्त कर दिया। महबूब अली अमरोहा जिले से आते हैं। शाहिद मंजूर मेरठ से और इकबाल महमूद सम्भल जिले से विधायक हैं। यह तीनों ही राज्य के पश्चिमी क्षेत्र से हैं। मुजफ्फरनगर इन मंत्रियों के मूल आवासीय जिलों के आसपास ही है।

समीक्षकों का मानना है कि राजनीतिक गुणा भाग में निपुण मुलायम सिंह यादव ने इन तीनों को प्रोन्नत कर मुजफ्फरनगर और उसके आसपास के क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी से अल्पसंख्यकों की नाराजगी को दूर करने का प्रयास किया है। यादव लोकसभा की अधिक से अधिक सीटे जीतना चाहते हैं और इसके लिए मुस्लिम वोट बैंक को साधे रखने उनके लिए बेहद जरुरी है। प्रोन्नति पाये मंत्री शाहिद मंजूर भी मानते हैं कि यादव ने तीन मुस्लिम राज्यमंत्रियों को एक ही दिन प्रोन्नत कर कैबिनेट मंत्री बनाकर एक संदेश दिया है। मंजूर ने दावा किया कि हुए मंत्रिमंडल के विस्तार से लोकसभा चुनाव पर अवश्य प्रभाव पड़ेगा क्योंकि इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा। मंजूर हालांकि यह मानने के लिए तैयार नहीं थे कि मंत्रिमंडल के विस्तार में धर्म विशेष का ध्यान रखा गया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सिद्धान्तों की राजनीति करती है लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि इससे प्रदेश में एक संदेश जरर जायेगा। उन्होंने संदेश पर खुलकर बोलने से इन्कार कर दिया।

समीक्षकों का मानना है कि यादव ने अखिलेश मंत्रिमंडल में राज्य के पश्चिमी क्षेत्र से आने वाले शाहिद मंजूर महबूब अली और इकबाल महमूद की प्रोन्नत करवाकर इनका राजनीतिक कद बढ़ाया है इससे नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां के एकाधिकार में कमी आने की सम्भावना है और वर्ग विशेष का मंत्रिमंडल में संतुलन बनाये रखने की कोशिश है। आजम खां के समाजवादी पार्टी से बाहर रहने पर शाहिद मंजूर के नेतृत्व में दोनों के साथ कई अन्य मुस्लिम विधायकों ने झंडा उठाया था इसलिए माना जाता है कि शाहिद मंजूर के साथ ही यह तीनों ही उनके राजनीतिक समर्थक नहीं हैं। इस विस्तार ने कई सवाल भी खड़े किये हैं। नगर विकास राज्यमंत्री चितरंजन स्वरप और मानपाल सिंह कई ऐसे वरिष्ठ नेता हैं जिन्हें प्रोन्नति की आस थी।

इन राज्यमंत्रियों और तीन-चार बार के कई विधायक ऐसे हैं जो इस पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं लेकिन उनके समर्थक चाहते थे कि इन्हें भी मंत्रिमंडल में अनुभव के आधार पर तरक्की मिले। अखिलेश यादव मंत्रिमंडल में अब 27 कैबिनेट मंत्री, 28 राज्यमंत्री और पांच स्वतंत्र प्रभार के मंत्री हो गये। मंत्रिमंडल में अब निर्धारित संख्या में मंत्री हो गये हैं इसलिए कहा जा सकता है कि अखिलेश यादव मंत्रिमंडल हाउसफुल हो गया है। इससे पहले गत 18 जनवरी को राज्यमंत्री मनोज पांडेय और राज्यमंत्री, स्वतंत्र प्रभार, गायत्री प्रजापति को प्रोन्नति कर कैबिनेट मंत्री की शपथ दिलायी गयी थी।
 


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