लड़ते लड़ते तीसरी पीढ़ी हो गई पर नहीं मिला प्लॉट

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Saturday, January 25, 2014-12:04 PM

 नई दिल्ली,(मनीषा खत्री): जब वर्ष 1947 में देश का बंटवारा हुआ तो बहुत सारे लोग विस्थापित हो गए थे। इसी दर्द भरे समय में पाक से भारत आए लोगों से भारत सरकार ने वादा किया कि उनको फिर से बसाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। यह वादा संसद में तत्कालीन शहरी विकास मंत्री दिवंगत वी.एन. गडगिल ने पाक से विस्थापित होकर आए लोगों से किया था। परंतु वह वादे आजादी के लगभग 66 साल बीत जाने के बाद भी पूरे नहीं हो पा रहे हैं। 

हालात ये हो गए हैं कि अपनी जमीन पर कब्जा पाने या उसके बदले जमीन पाने के लिए इन लोगों की 3-3 पीढ़ी बीत चुकी हैं परंतु अपना हक पाने की लड़ाई जारी है। उस समय केंद्रीय मंत्री गडगिल द्वारा किए गए वादों को पूरा कराने का काम अब अदालतें कर रही हैं। ऐसे ही एक मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डी.डी.ए.) को फटकार लगाते हुए उसकी तरफ से दायर अपील को खारिज कर दिया है और कहा है कि वह याचिकाकत्र्ता को उसकी पसंद का प्लाट राजेंद्र नगर में दे। न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने अपने एक सदस्यीय खंडपीठ के आदेश को सही ठहराते हुए डी.डी.ए पर 25 हजार रुपए भी जुर्माना लगाया है। 
 
कोर्ट ने कहा कि वर्ष 1947 में भारत सरकार द्वारा किए गए वादे अभी तक पूरे नहीं हो पा रहे हैं और उनको पूरा कराने का काम अब अदालतों को करना पड़ रहा है। एक सदस्यीय खंडपीठ ने याचिकाकर्ता सुरजीत सिंह की अपील को स्वीकार करके कुछ गलत नहीं किया है। अगर उसकी जगह सड़क चौड़ी करने में प्रयोग की जा रही है तो उसे पसंद की जगह पाने का हक है।
 
दुर्भाग्यपूर्ण : कोर्ट
 
खंडपीठ ने कहा कि जब बंटवारा हुआ था तो बहुत सारे लोगों को अपने घर छोडऩे पड़े थे। उसी समय याचिकाकर्ता के परिजन भी पाक से भारत आकर बस गए और झंडेवालान इलाके में रहने लगे। तीसरी पीढ़ी लड़ रही है आसियाना पाने के लिए। कोर्ट ने कहा कि आजादी के इतने सालों बाद भी एक परिवार को न्याय न मिल पाना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को इसे अपने स्तर पर ही समाधान करना चाहिए लेकिन कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।
 
तारीख पर तारीख
 
हरबंस सिंह बंटवारे के समय भारत आकर बसे थे और दिल्ली के झंडेवालान इलाके में रहने लगे थे। उसने डी.डी.ए. द्वारा विस्थापित लोगों के लिए बनाई गई स्कीम के तहत अपने लगभग 239 स्केयर यार्ड के प्लाट को नियमित कराने की मांग की या फिर बदले में प्लाट मांगा। उसेसे डी.डी.ए. ने अपनी स्कीम को एक कैटेगरी में रखा, जिसके तहत उसे प्लाट दिया जाना था।  27 सितम्बर 1989 को उसकी मौत हो गई।  अब उसके 3 बेटों में से 2 बेटों की भी मौत चुकी है। इस केस को उसका एक बेटा व पोते लड़ रहे हैं।
 

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