सपा सरकार लाखों खर्च करके भी नही दिला पाई दंगा पीड़ितों को न्याय

  • सपा सरकार लाखों खर्च करके भी नही दिला पाई दंगा पीड़ितों को न्याय
You Are HereNational
Saturday, January 25, 2014-12:50 PM

मुजफ्फरनगर: दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रदेश सरकार ने लाखों रुपया खर्च किया और वर्ग विशेष को खुश करने के  लिए विशेष अधिवक्ता भी नियुक्त किया। मगर दंगा पीड़ितों को समुचित न्याय नही दिला पायी। भाजपा ने इसे दंगा पीडितों के लिए केवल दिखावा करने का प्रयास बताया है। मुजफ्फरनगर जनपद में 27 अगस्त को कवाल हत्या कांड के बाद 7 सितम्बर को आयोजित महा पंचायत के बाद सामप्रदायिक दंगा भड़क गया था। जिसमें लगभग 56 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था और हजारों लोग बेघर हो गये थे। जिन्हे दंगा राहत शिविरों में रहना पड़ा था। यह दंगा देश की मुख्य घटनाओं में से एक रहा है। इस घटना के बाद देश का प्रधान मंत्री व यूपीए की अध्यक्षा सोनिया गांधी ने राहुल गांधी के साथ दंगा शिविरो का दौरा किया था और विपक्ष ने भी सरकार के फेल हो जाने का आरोप लगाया था। जिसके लिए प्रदेश सरकार को बड़ी फजीहत झेलनी पड़ी थी।

सरकार पर मुस्लिमों ने भी यथोचित सहायता न करने का आरेाप लगाया था। सरकार ने इस फसीहत से बचने और वर्ग विशेष को खुश करने के लिए दंगा पीडितों को न्याय दिलाने का नारा लगाया था। जिसके तहत एक विशेष अधिवक्ता की 19 नवम्बर 2013 को  नियुक्ति भी की गयी थी। जिसे भाजपा व समाज सेवियों सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। जिसका जवाब प्रदेश सरकार ने 21 जनवरी 2014 को देना था। मगर सरकार ने 15 जनवरी को जिलाधिकारी को पत्र भेज कर विशेष अधिवक्ता की नियुक्ति समाप्त कर दी। इस प्रकार दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने में प्रदेश सरकार ने लाखों रुपया खर्च कर दिया। जनपद में  208 दंगा आरोपियों की जमानत याचिका अदालत में पेश की गयी। जिसकी पैरवी विशेष अधिवक्ता ने की और 208 जमानत याचिकाओं से केवल 6 जमानत याचिका ही खारिज करवा पाये। इस प्रकार 202 दंगा आरोपी जमानत पर रिहा हो गये और दंगा पीडित प्रथम न्याय से वंचित रह गये।

भाजपा के पूर्व मंत्री सुधीर बालियान का कहना है कि सपा सरकार का वर्ग विशेष का प्रेम मात्र एक दिखावा है और इस बहाने अपने चहेतों का घर भरना ही उनका उद्देश्य है। जिस काम के लिए सरकार ने भारी फीस देकर एक विशेष अधिवक्ता की नियुक्ति की है। इस कार्य के सरकार ने जनपद में 18 सह शासकीय अधिवक्ता और एक शासकीय अधिवक्ता की नियुक्ति पहले ही कर रखी है। जबकि जनपद में अदालत मात्र 15 है। इस प्रकार 4 अधिवक्ता अधिक है। यदि उन से ये कार्य कराया जाता तो जनता के पैसे की बर्बादी न होती और दंगा पीडितों को न्याय भी मिलता।





 


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You