बेनी ने मुलायम का साथ देने के लिए मांगी माफी

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Saturday, January 25, 2014-3:50 PM

लखनऊ: केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव पर सन् 1990 में अयोध्या कांड के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से मिले होने का आरोप लगाते हुए आज मुलायम सिंह यादव का साथ देने के लिए जनता से सार्वजनिक रुप से माफी मांगी। वर्मा ने यहां कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह को नीचा दिखाने के लिए यादव मिले हुए थे और उस दौरान उनका साथ देने के लिए वह जनता से माफी मांगते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी आत्मकथा माइ लाइफ माइ कंट्री में इसका साफ उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा से मिलकर नवम्बर 1990 में यादव ने अयोध्या के टेढी बाजार पुलिस चौकी को रामजन्मभूमि थाना बना दिया था। यादव के ही मुख्यमंत्रित्व काल में आडवाणी को छह दिसम्बर 1992 की घटना के लिए उच्चतम न्यायालय में शपथपत्र देकर निर्दोष बताया गया था।

उन्होंने कहा कि उन्हें दुख है कि उस दौरान वह यादव के साथ थे जिसके लिए वह जनता से माफी मांगते हैं। यादव के अत्यंत खास रहे वर्मा ने दावा किया कि उन्होंने तो दोस्ती निभायी। तीन बार उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की पेशकश की गई लेकिन तीनों बार उन्होंने यादव को आगे कर दिया था। इस्पात मंत्री ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक अध्यक्ष कांशीराम और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी उन्हें मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे लेकिन उन्होंने स्वयं बनने के बजाय यादव को मुख्यमंत्री बनवाया। उन्होंने कहा कि 1990 की तरह यादव एक बार फिर नरेंद्र मोदी समेत भाजपा नेताओं से मिल गए हैं। गत 23 जनवरी को गोरखपुर में हुई मोदी की रैली और वाराणसी में  यादव की रैली की पटकथा भाजपा महासचिव अमित शाह ने लिखी थी। दोनों के भाषण का विश्लेषण करने पर यही लगता है कि दोनों की पटकथाएं पहले से ही तैयार थीं।

वर्मा ने कहा कि इधर भाजपा और सपा की रैलियां एक साथ हो रही हैं जिससे यह संदेश जाए कि भाजपा से सपा ही लड़ रही है लेकिन अन्दर से दोनों मिले हुए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी कहते हैं कि बाप-बेटे उनके पीछे पड़े हैं लेकिन सच्चाई यह है कि कांग्रेस उनके पीछे पड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि भाजपा से यादव मिले नहीं होते तो गोधरा कांड के बाद सपा का गुजरात विधानसभा चुनाव लडऩे का क्या औचित्य था। मुस्लिम मतों में विभाजन और मोदी को जिताने के लिए सपा ने गुजरात विधानसभा का चुनाव लड़ा था।




 


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