भारत की जनता गुस्से में है: प्रणव

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Saturday, January 25, 2014-3:51 PM

नई दिल्ली: जनवरी वार्ता राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने आज सरकारों को सचेत किया कि देश की जनता भ्रष्टाचार को लेकर गुस्से में है और अगर इसे खत्म नहीं किया गया तो मतदाता उन्हें हटा देंगे।  गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रणव ने कहा कि भ्रष्टाचार ऐसा कैंसर है जो लोकतंत्र को कमजोर करता है तथा राज्य की जड़ों को खोखला करता है। यदि भारत की जनता गुस्से में है तो इसका कारण है कि उन्हें भ्रष्टाचार तथा राष्ट्रीय संसाधनों की बर्बादी दिखाई दे रही है। अगर सरकारें इन खामियों को दूर नहीं करती तो मतदाता उन्हें हटा देंगे।

 
राष्ट्रपति ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में पाखंड का बढऩा भी खतरनाक है1 चुनाव किसी व्यक्ति को भ्रांतिपूर्ण अवधारणाओं को आजमाने की अनुमति नहीं देते हैं। जो लोग मतदाताओं का भरोसा चाहते हैं उन्हें केवल वही वादा करना चाहिए जिन्हें पूरा करना संभव है1 सरकार कोई परोपकारी निकाय नहीं है। लोकलुभावन अराजकता, शासन का विकल्प नहीं हो सकती। झूठे वायदों की परिणति मोहभंग में होती है जिससे क्रोध भडकता है तथा इस क्रोध का एक ही स्वाभाविक निशाना होता है सत्ताधारी वर्ग।
 
 उन्होंने कहा कि यह क्रोध  केवल तभी शांत होगा जब सरकारें वह परिणाम देंगी जिनके लिए उन्हें चुना गया था अर्थात सामाजिक और आॢथक प्रगति, और कछुए की चाल से नहीं बल्कि घुडदौड़ के घोड़े की गति से। महत्वाकांक्षी भारतीय युवा उसके भविष्य से विश्वासघात को क्षमा नहीं करेंगे। जो लोग सत्ता में हैं उन्हें अपने और लोगों के बीच भरोसे में कमी को दूर करना होगा। जो लोग राजनीति में हैं उन्हें यह समझना चाहिए कि हर एक चुनाव के साथ एक चेतावनी जुड़ी होती है कि  परिणाम दो अथवा बाहर हो जाओ।
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