आरोपी के साथ आखिरी बार देखे जाने के आधर पर नहीं कहा जा सकता हत्या का दोषी : हाईकोर्ट

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Saturday, January 25, 2014-7:22 PM

 नई दिल्ली : 15 साल पहले एक छह साल के बच्चों का अपरहण करके उसकी हत्या करने के मामले में उम्रकैद की सजा पाए आरोपी को राहत देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने उसे बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर व न्यायमूर्ति सुनीता गुप्ता की खंडपीठ ने आरोपी सुरेंद्र प्रसाद को बरी करते हुए कहा कि आखिरी बार आरोपी को मृतक के साथ देखा गया था,सिर्फ इस आधार पर आरोपी को हत्या के मामले में दोषी करार नहीं दिया जा सकता है।

ऐसे में अभियोजन पक्ष अपना आरोप साबित नहीं कर पाया है। इसलिए निचली अदालत के उस आदेश को रद्द किया जाता है,जिसके तहत आरोपी को उम्रकैद की सजा दी गई थी। निचली अदालत ने 16 अप्रैल 2001 को सुरेंद्र प्रसाद को हत्या,अपहरण सहित अन्य धाराओं में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा दी थी। जिसे उसने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

पुलिस के अनुसार सुरेश यादव ने बीस जनवरी 1999 को इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि 19 जनवरी 1999 को उसका छह साल का बेटा पड़ोस में हो रहे जागरण में गया था और वापिस नहीं आया। उसने उसे काफी खोजा परंतु नहीं मिला। बाद में महामाई मंदिर के पास रेलवे लाइन पर उसके बेटे का शव मिला। इसी मामले में आरोपी सुरेंद्र को पकड़ा गया था। उसके एक साथी विजय को निचली अदालत ने ही सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।

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