नाबालिग से अप्राकृतिक संबंध बनाने के आरोपी को राहत

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Saturday, January 25, 2014-7:54 PM

नई दिल्ली : एक नाबालिग बच्चे से अप्राकृति संबंध बनाने के मामले में आरोपी को निचली अदालत के बाद अब दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी दोषी मनाने से इंकार कर दिया है। न्यायमूर्ति  एस.मुरलीधर की खंडपीठ ने आरोपी नागेंद्र शाह को राहत देते हुए दिल्ली पुलिस की अपील को खारिज कर दिया है। दिल्ली पुलिस ने निचली अदालत द्वारा नागेंद्र को बरी करने के आदेश को न्यायालय में चुनौती दी थी।

 
न्यायालय ने कहा कि पीड़ित बच्चा व उसकी मां अपने बयान से मुकर गए हैं। ऐसे में अभियोजन पक्ष अपना केस साबित करने में नाकाम रहा है। अदालत ने कहा कि निचली अदालत ने अपने आप को संतुष्ट कर लिया था कि कहीं पीड़ित बच्चे व उसकी मां ने किसी दबाव में तो अपना बयान नहीं बदला है।
 
वैसे गवाहों को सुरक्षा देने का मामला काफी बड़ा है,जिसके लिए योजना बनाई जानी चाहिए परंतु सरकार इस तरफ कोई कदम नहीं उठा रही है। खंडपीठ ने कहा कि जब तक यह साबित न कर दिया जाए कि गवाहों को धमकाया गया है,तब तक यह मानना सही नहीं है कि गवाहों ने दबाव में बयान दिया है। आपराधिक मामले में आरोपी को कड़े परिणाम भुगतने होते हैं,ऐसे में किसी संभावना के आधार पर उसे दोषी करार नहीं दिया जा सकता है। 
 
18 दिसम्बर 2012 को निचली अदालत ने आरोपी नागेंद्र शाह को अप्राकृतिक संबंध बनाने सहित अन्य धाराओं के तहत बरी कर दिया था। पुलिस को सूचना मिली थी कि 12 जुलाई 20011 को अशोका रोड़ पर नौकरों के लिए बने क्वार्टर में अपने परिजनों के साथ रहने वाले छठी कक्षा के छात्र से अप्राकृतिक संबंध बनाए गए हैं। बच्चे ने बताया कि रात के आठ बजे के करीब उसकी मां ने उसे गोल मार्केट में चिकन लेने के लिए बेचा था। तभी आर.एम.एल की तरफ से एक इनोवो कार आई और ड्राईवर ने गोल मार्केट का रास्ता पूछने के बहाने उसे गाड़ी में बैठा लिया। जिसके बाद वह बच्चे को बिरला मंदिर के पास ले गया और गाड़ी के अंदर ही उससे अप्राकृतिक संबंध बनाए।

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