यमुना को प्रदूषित करने में दिल्लीवालों का भी है हाथ

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Saturday, January 25, 2014-8:56 PM

नई दिल्ली : यमुना में प्रदूषण और बढ़ती आमोनिया की मात्रा के लिए दिल्ली सरकार हमेशा से ही पड़ोसी राज्य हरियाणा को जिम्मेदार ठहराती आई है, लेकिन इसके  लिए दिल्ली वाले भी कम जिम्मेदार नहीं ।

क्योंकि सर्वे के मुताबिक यमुना में प्रतिदिन गिरने वाला 22 टन कचरा दिल्ली का होता है। जिसे अवैध व वैध औद्योगिक क्षेत्रों के साथ बूचरखानों से निकाला जाता है। इसे रोकने की योजना तो दिल्ली सरकार की ओर से कई बार बनी, लेकिन आज तक अमली जामा नहीं पहनाया जा सका।

केवल दिखावे के लिए यमुना किनारे पंप लगाने की कवायद जरूर शुरू की गई थी, जिसमे दावा किया गया था कि इसे नालों से जोड़ा जाएगा और उससे निकलने वाला जहरीला पानी शोधित होकर ही यमुना में गिरेगा। लेकिन सारी कवायद या तो घोषणाओं तक सीमित रह गई, या फिर पायलट प्रोजेक्ट से आगे नहीं बढ़ पाई। इसका नतीजा यह हुआ कि यमुना में हर साल अमोनिया की मात्रा बढ़ जाती है और दिल्लीवालों को पीने के पानी का संकट गहरा जाता है।

एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की रिपोर्ट की मानें तो नजफगढ़ के बाद तो यमुना नाले में तब्दील हो जाती है। क्योंकि उस इलाके में चलने वाले अवैध औद्योगिक क्षेत्रों से कचरा सीधे इसमें गिराया जाता है। यही वजह है कि कभी हिमाचल प्रदेश की नदियों से भी साफ रहने वाला नजफगढ़ का नहर आज नाला बन चुका है।

यमुना जियो अभियान के संरक्षक मनोज मिश्र का कहना है कि यमुना में प्रदूषण सिर्फ हरियाणा से ही शुरू और खत्म नहीं होता है। यमुना में प्रदूषण के लिए दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश भी जिम्मेदार है और इसकी सफाई के लिए इन तीनों ही राज्यों को संकल्प लेना होगा। इस संस्था ने पिछले वर्ष फरवरी महीने में यमुना के पानी की जांच की तो पता चला कि उसमें  क्रोमियम-0.5 एमजी, शीश-0.3 एमजी, लौह-3.5 एमजी मौजूद था, जो कि वर्ष 2012 के मुकाबले काफी ज्यादा था।


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