लोकवादी अराजकता शासन के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती : राष्ट्रपति

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Saturday, January 25, 2014-10:07 PM
नई दिल्ली : गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने राष्ट्र के नाम संदेश दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि चुनाव किसी भी व्यक्ति को भ्रम पैदा करने का अधिकार पत्र नहीं देता। जो भी मतदाताओं का भरोसा जीतना चाहते हैं, वे केवल वही वादे करें जो संभव हो। सरकार कोई परमार्थ संगठन नहीं होती है।
 
उन्होंने बिना किसी पार्टी या नेता का नाम लिए कहा कि लोकवादी अराजकता शासन के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती। झूठे वादे से असंतोष पैदा होता है। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे लिए लोकतंत्र कोई उपहार नहीं है, बल्कि हर एक नागरिक का मौलिक अधिकार है; जो सत्ताधारी हैं उनके लिए लोकतंत्र एक पवित्र भरोसा है। जो इस भरोसे को तोड़ते हैं, वह राष्ट्र का अनादर करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान के व्यापक प्रावधानों से भारत एक सुंदर, जीवंत तथा कभी-कभार शोरगुल युक्त लोकतंत्र के रूप में विकसित हो चुका है।
 
मुखर्जी ने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश सदैव खुद से तर्क-वितर्क करता है। यह स्वागत योग्य है, क्योंकि हम विचार-विमर्श और सहमति से समस्याएं हल करते हैं, बल प्रयोग से नहीं। परंतु विचारों के ये स्वस्थ मतभेद, हमारी शासन व्यवस्था के अंदर अस्वस्थ टकराव में नहीं बदलने चाहिए।
 
राष्ट्रपति ने कहा कि भ्रष्टाचार लोकतंत्र के लिए कैंसर की तरह है, जो हमारे राज्य की जड़ों को खोखला करता है। उन्होंने कहा कि यदि भारत की जनता गुस्से में है, तो इसका कारण है कि उन्हें भ्रष्टाचार तथा राष्ट्रीय संसाधनों की बर्बादी दिखाई दे रही है। यदि सरकारें इन खामियों को दूर नहीं करतीं तो मतदाता सरकारों को हटा देंगे।
 
राष्ट्रपति ने 65वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत और विदेशों में बसे सभी भारतवासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई दी। उन्होंने सशस्त्र सेनाओं, अर्ध-सैनिक बलों तथा आंतरिक सुरक्षा बलों के सदस्यों को अपनी विशेष बधाई दी
 

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