जनलोकपाल दो-तीन दिन में

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Sunday, January 26, 2014-2:23 PM

नई दिल्ली (अशोक शर्मा): जनलोकपाल की तर्ज पर दिल्ली में लोकायुक्त कानून को मजबूत बनाने की तैयारी लगभग पूरी हो गई है। आगामी 27 जनवरी को इससे जुड़े बिल को दिल्ली मंत्रिमंडल की होने वाली बैठक में मंजूरी मिलने के आसार हैं। इसके बाद ही फरवरी माह में ऐतिहासिक रामलीला मैदान में दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर जनलोकपाल बिल पास किया जाएगा। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का दावा है कि इस बिल में भ्रष्टाचार का आरोप साबित होने पर सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।

खास बात यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय का भी इसके अधीन रखा गया है। सोमवार को एक तरफ जहां मुख्यमंत्री व उनके मंत्रिमंडल के सदस्य मेनिफैस्टों में किए गए अपने एक और वादे को पूरा करने के लिए जनलोकपाल बिल पर चर्चा कर उसे मंजूरी देने की दिशा में काम करेंगे, वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के बागी विधायक विनोद कुमार बिन्नी अपनी ही पार्टी के नेताओं के खिलाफ अनशन पर बैठेंगे। उनका सीधा आरोप है कि पार्टी का दोहरा चरित्र अब जनता के सामने आ गया है।

याद रहे कि वर्ष 2012 में दिल्ली में भ्रष्टाचार के खिलाफ हुए अन्ना आंदोलन के बाद से जनलोकपाल बिल आम जनता की जुबाव पर चढ़ गया था। हर कोई चाहता था कि भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए एक सख्त कानून की जरूरत है। सियासी पार्टी आप बनाकर अरविंद केजरीवाल सरकार ने इस अहम चुनावी वायदे को पूरा करने का पूरा खाका तैयार कर लिया है। सोमवार को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में यदि इस बिल के प्रारूप को मंजूरी मिल गई, तो आप सरकार द्वारा इसे जल्द से जल्द इसे पास कराने की हरसंभव कोशिश की जाएगी। जानकारी के अनुसार दिल्ली में मौजूदा लोकायुक्त को और मजबूत बनाने के उदेश्य से लाए जा रहे जन लोकपाल बिल 2014 में भ्रष्टाचार को लेकर कई कड़े प्रावधान किए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार भ्रष्टाचार के दोषी पाए गए सरकारी कर्मचारी को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। लोकायुक्त के पास किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त करने, हटाने या उसे पदावनत करने का अधिकार होगा। लोकायुक्त के अधीन सरकारी विभागों के अलावा वे संस्थाएं भी होंगी जो किसी न किसी तरीके से सरकारी मदद लेती हैं। जनलोकपाल बिल के तहत दिल्ली में दस लोकायुक्त और एक चेयरमैन की नियुक्ति का प्रावधान होगा। इनमें से पांच लोकायुक्त वैसे जज या वकील होंगे जिन्हें सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट में 20 साल के कामकाज का अनुभव होगा।

बाकी पांच लोकायुक्तों की नियुक्ति समाज के अलग-अलग वर्गों से की जाएगी। लोकायुक्त के चयन के लिए पूर्व जजों, पूर्व सैनिकों और समाज के अलग-अलग क्षेत्रों के जाने माने लोगों की सर्च कमेटी बनाई जाएगी। सर्च कमेटी से प्रस्तावित नाम सेलेक्शन कमेटी के पास जाएंगे। मुख्यमंत्रीए विपक्ष के नेता और हाईकोर्ट के दो जज सेलेक्शन कमेटी के सदस्य होंगें। ये कमेटी लोकायुक्त के लिए नामों का चयन कर राष्ट्रपति के पास सिफारिश भेजेगी। 


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