गुजरात में कौन होगा नरेंद्र मोदी का उत्तराधिकारी ?

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Monday, January 27, 2014-12:33 PM

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी के पी.एम. पद प्रत्याशी और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जिस गति के साथ आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए पूरे देश में चुनाव प्रचार में लगे हैं, उसे देखकर लगता है कि चाहे लोकसभा चुनाव के नतीजे जो भी हों, लेकिन ये तय है कि चार बार गुजरात के मुख्यमंत्री रहने वाले नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता दिल्ली हो जाएगी। अब सवाल ये उठता है कि नरेंद्र मोदी के बाद गुजरात में उनकी जगह कौन लेगा? क्या गुजरात के मुख्यमंत्री ने सेकेंड लाइन का नेतृत्व तैयार कर लिया है? या इसका फैसला अप्रैल-मई में होने वाले आम चुनाव के बाद पार्टी केंद्रीय नेतृत्व को करना होगा?

विशेषज्ञों और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी में सेकेंड लाइन का ऐसा कोई नेता नहीं है, जो मोदी की जगह ले सके। वहीं भाजपा को भरोसा है कि उसके कैडर आधारित सिस्टम में ऐसे कई नेता हैं, जो इस शीर्ष  जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकते हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व इन शीर्ष दावेदारों के बारे में हमेशा चुप रहा है, लेकिन राजस्व मंत्री आनंदीबेन पटेल, वित्त मंत्री नितिन पटेल, ऊर्जा मंत्री सौरभ पटेल और विधानसभा के स्पीकर वजू वाला का नाम समय-समय पर इस जिम्मेदारी के लिए सामने आता रहा है।

कुछ दिन पहले गुजरात भाजपा के अध्यक्ष आर.सी फलदू ने कहा था कि राज्य सरकार और पार्टी की कार्यपद्धति इस तरह से व्यवस्थित है कि नरेंद्र मोदी की अनुपस्थिति में भी राज्य सरकार सामान्य तरह से ही काम करेगी। हमारे नेताओं ने प्रतिनिधित्व की शक्ति को विकेंद्रीकृत किया हुआ है।

राजनीतिक मामलों के जानकार विद्युत जोशी कहना है कि गुजरात भाजपा यूनिट के साथ जो हुआ वह ठीक वैसा ही जैसे इंदिरा गांधी के आने के बाद कांग्रेस के साथ हुआ था। तब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के कार्यकाल के दौरान नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मजबूत संगठनात्मक संस्कृति के साथ मिलकर बेहतर प्रदर्शन किया। उस वक्त राज्य में भाजपा पार्टी कम व्यक्तिवादी ज्यादा हो गई थी, जो भविष्य में प्रजातंत्र को नुक्सान पहुंचाने के साथ ही पार्टी को भी तोड़कर रख देता। विद्युत जोशी का कहना है कि अगर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनते हैं, तो गुजरात भाजपा को इसका खामियाजा उठाना पड़ेगा।

गुजरात में मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार आनंदीबेन पटेल, वजू वाला और सौरभ पटेल हैं। वजू वाला ने 2001 के उपचुनाव के दौरान मोदी के लिए अपनी सीट राजकोट को छोड़ा था। वाला तभी से ही मोदी के पसंदीदा हैं। इसके साथ सौराष्ट्र क्षेत्र में वाला की पकड़ काफी अच्छी है। सौराष्ट्र को भाजपा का गढ़ माना जाता है। जहां तक बात आनंदीबेन और सौरभ पटेल की है, तो सौरभ पटेल का चयन ज्यादा ठीक होगा।  ऐसी भी संभावना है कि मोदी इन सभी दावेदारों को छोड़ किसी तीसरे व्यक्ति का नाम आगे बढ़ाकर सभी को आश्चर्य में डाल दें। वह किसी ऐसे व्यक्ति को इस पद की जिम्मेदारी सौंपना चाहेंगे, जिसे वह दिल्ली से आदेश दे सकें।

प्रमुख दावेदारों पर एक नजर-

आनंदीबेन पटेल
इन सभी दावेदारों में 71 वर्षीय आनंदीबेन पटेल का नाम सबसे अहम हैं। इन्हें नरेंद्र मोदी के काफी करीब माना जाता है। हालांकि इन्हें जनता में लोकप्रिय लीडर के तौर पर नहीं देखा जाता, पर पार्टी के भीतर और नौकरशाहों के जोड़ के रूप में उनकी चर्चा है। वह शक्तिशाली पटेल समुदाय से आती हैं और अहमदाबाद में उनका गहरा प्रभाव है। आनंदीबेन पटेल वर्ष 1998 से विधानसभा की सदस्य हैं और फिलहाल गुजरात सरकार में राजस्व, सूखा राहत, भूमि सुधार और पुर्नवास जैसे कई विभागों का कार्यभार संभाल रही हैं। वहीं मुख्यमंत्री पद के लिए अगर कोई बात उनके खिलाफ जा सकती है, तो वह है, उनका स्पष्टवादी स्वभाव। अपने इस स्वभाव की वजह से कई पार्टी सदस्यों से उनकी अनबन भी हो चुकी है, जिसमें अमित शाह का नाम प्रमुख है। ये सार्वजनिक तौर पर तो आनंदीबेन का समर्थन करते हैं, पर उनकी कार्यशैली को पसंद नहीं करते।

नितिन पटेल
नितिन पटेल को 2012 के विधानसभा चुनाव के बाद वित्त मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पटेल को राजनीति और प्रबंधन दोनों का खासा अनुभव है। वह वर्ष 1995 में केशुभाई पटेल के शासनकाल में भी स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री रह चुके  हैं।

सौरभ पटेल
उद्यमी से राजनेता बने 55 वर्षीय सौरभ पटेल सभी दावेदारों में सबसे कम उम्र के हैं और करीब एक दशक से उर्जा और पैट्रोकेमिकल विभागों को संभाल रहे हैं। गुजरात सरकार में उर्जा मंत्री सौरभ मोदी के वफादार माने जाते हैं। इसके अलावा वह मशहूर बिजनेसमैन धीरूभाई अंबानी के बड़े भाई रमणिक भाई अंबानी के दामाद हैं।

वजू वाला
6 बार विधानसभा सदस्य रह चुके वजू वाला के पास 14 बार राज्य का बजट पेश करने का रिकॉर्ड है। 2013 में विधानसभा अध्यक्ष बनने से पहले वह वित्त मंत्री रह चुके हैं।


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