घातक हो सकती हैं चिकनी चुपड़ी बातें और जनसंपर्क का छलावा: सिब्बल

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Tuesday, January 28, 2014-1:41 AM

नई दिल्ली : केन्द्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने आज चेतावनी दी कि नीतिगत जड़ता और प्रशासन में समस्या की धारणा को मतदाताओं को एक ‘‘तानाशाह’’ का चुनाव करने की ओर नहीं ले जाना चाहिए और कहा कि यह विनाश की रेसेपी हो सकती है। उन्होंने इस संबंध में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी में हुए होलोकास्ट ‘यहूदी नरसंहार’ का भी जिक्र किया।

सिब्बल ने कहा कि भारतीय मतदाताओं का एक वर्ग देश की कथित नयी निर्णायक दिशा के लिए हालिया अतीत की घटनाओं को नजरअंदाज करने के लिए अपनी इच्छा से तैयार है। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए सिब्बल ने कहा, ‘‘चिकनी चुपड़ी बातें और जनसंपर्क का छलावा गणतंत्र के हमारे मूल सिद्धांत के लिए घातक हो सकते हैं। बहुसंख्यक जब अपनी धार्मिक भावनाओं को आगे लाता है तो साम्प्रदायिकता की समस्या बढ़ती है। भारत जैसे जटिल बहु-सांस्कृतिक समाज में, यह विनाश की रेसेपी हो सकती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी व्यक्ति जो स्वतंत्र अभिव्यक्ति और कलात्मक गतिविधियों का विरोध करता हो वह लोकतांत्रिक नहीं हो सकता है। लोकतंत्र में हमारा विश्वास और लोकतांत्रिक संस्थाएं दांव पर लगी हैं।’’ उन्होंने ‘होलोकास्ट मेमोरियल डे’ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह बातें कहीं। उनकी वेबसाइट पर स्पष्ट किया गया है कि यह उनके व्यक्तिगत विचार हैं। उनका भाषण भी इस वेबसाइट पर उपलब्ध है।

उन्होंने कहा कि पिछली शताब्दी के 20 के दशक की तरह, जब लोगों को समस्याएं सुलझती हुई नहीं दिख रहीं थी और वह इंतजार करके थक चुके थे, उन्होंने एक मजबूत नेता की मांग शुरू कर दी।


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