नहीं सुधर रही है रैन बसेरों की हालत

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Tuesday, January 28, 2014-1:03 PM

वेस्ट दिल्ली (कार्तिकेय हरबोला): दिल्ली में बेघरों की मुश्किलें अब भी कम नहीं हुई हैं। दिल्ली में पारे का स्तर लगातार नीचे बना हुआ है। सरकार की ओर से बनाए गए रैन बसेरों में सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में, बेघर व गरीबों के लिए ठंड में रात गुजारना किसी चुनौती से कम नहीं है।

लगातार छपी रिपोर्टों के बाद भी हालात पर कोई असर नहीं पड़ा। प्रशासन का रवैया पहले जैसा बना हुआ है और अब कोर्ट ने भी केजरीवाल और प्रशासन को फटकार लगाई है। देखना है कि इस फटकार सरकार और प्रशासन पर कितना असर पड़ता है और हालात में कितना सुधार देखने को मिलता है।

गौरतलब है कि आम आदमी की दिक्कतों को तरजीह देने वाली आम आदमी पार्टी (आप) का भी इस ओर ध्यान नहीं है। रात में ठंड के थपेड़े झेल रहे लोगों की मानें तो केजरीवाल के आने के बाद उन्हें लगता था कि उनकी समस्याओं का समाधान होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

रोहिणी सैक्टर-3 में पुरुष बेघरों के लिए बनाए गए रैन बसेरे में सुविधाओं का अभाव है। 1 वर्ष पहले बनाया गया यह टिन शैड जगह-जगह से टूट चुका है। रात में यहां शरण लेने वालों के लिए पर्याप्त प्रबंध नहीं हैं। रैन बसेरों के आस-पास गंदगी का अंबार है। इनमें अक्सर जानवर घुस आते हैं।

कुछ जगहों पर तो रैन बसेरों में बिजली बिल के नाम पर मनमाने पैसे भी वसूले जा रहे हैं, जबकि रैन बसेरा संचालकों का कहना है कि सरकारी आदेश के अनुसार ऐसा किया जा रहा है। रोहिणी सैक्टर-26 स्थित रैन बसेरा चलाने वाली संस्था को दिए जा रहे पैसे के बावजूद लोगों को गर्म पानी नहीं मिल रहा है। इससे सर्दी इनके लिए मुश्किल बनी हुई है।

पश्चिमी दिल्ली में लगभग 55 रैन बसेरे हैं। इनमें रहने वाले बताते हैं कि यहां ठंड से बचने की पर्याप्त सुविधा नहीं है। विकास का प्रतीक कहे जाने वाले फ्लाईओवर व मैट्रो स्टेशनों के नीचे लोगों को खुले में सोते देखा जा सकता है। द्वारका के कई सैक्टर, गोयला डेयरी, जनकपुरी जिला केंद्र, हरिनगर, मादीपुर, विकासपुरी मोड़, राजा गार्डन, रोहिणी,  मंगोलपुरी उत्तमनगर, द्वारका मोड़ समेत कई इलाके हैं, जहां खुले में चादर ओढ़कर रात कटती है।

रोहिणी सैक्टर-3 में पुरुष बेघरों के लिए बनाए गए रैन बसेरे में सुविधाओं का अभाव है। 1 वर्ष पहले बनाया गया यह टिन शैड जगह-जगह से टूट चुका है। रात में यहां शरण लेने वालों के लिए पर्याप्त प्रबंध नहीं हैं। रैन बसेरों के आस-पास गंदगी का अंबार है। इनमें अक्सर जानवर घुस आते हैं।

कुछ जगहों पर तो रैन बसेरों में बिजली बिल के नाम पर मनमाने पैसे भी वसूले जा रहे हैं, जबकि रैन बसेरा संचालकों का कहना है कि सरकारी आदेश के अनुसार ऐसा किया जा रहा है। रोहिणी सैक्टर-26 स्थित रैन बसेरा चलाने वाली संस्था को दिए जा रहे पैसे के बावजूद गर्म पानी नहीं मिल रहा है।

इस प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराने के बाबत सरकार की ओर से हमें कोई निर्देश नहीं हैं। हमें मिलने वाले बजट में सिर्फ केयर टेकर को देने के लिए पैसा मिलता है। ऐसे में, हम अपनी ओर से इतना खर्चा नहीं कर सकते।
-राधा भारद्वाज, देव एजुकेशन एंड वैलफेयर सोसाइटी एन.जी.ओ.

 

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