1984 और 2002 के दंगों संबंधी राहुल की टिप्पणियों पर विभिन्न दलों की प्रतिक्रिया

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Tuesday, January 28, 2014-1:54 PM

नई दिल्ली: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने टेलीविजन पर दिए अपने एक  इंटरव्यू में भाजपा पर निशाना साधते हुए बीजेपी के पीएम इन वेटिंग नरेंद्र मोदी के बारे में कहा कि 2002 में गुजरात दंगे भड़काने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार जिम्मेदार है। गुजरात दंगे के लिए मोदी सरकार को दोषी ठहराने और सिख दंगों पर बयान के बाद बीजेपी नेताओं और अन्य दल के नेताओं ने राहुल पर निशाना साधा है।

मुख्तार अब्बास नकवी: बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि करप्शन के किले में बैठ कर राहुल गांधी लूट का मजा लेते रहे और आज जब उस लूट की लंका में आग लगी है तो वे चिंतित हैं। एक तरफ करप्शन और कुशासन की विरासत है तो दूसरी और सुशासन और राष्ट्रवाद की लड़ाई है। आज देश में कांग्रेस के करप्शन के खिलाफ जो आंधी है उसे कोई नहीं रोक सकता।


सुब्रमण्यम स्वामी: बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि राहुल कहते हैं कि नरेंद्र मोदी उस समय मुख्यमंत्री थे तो वे दोषी हैं लेकिन जब 84 में कत्लेआम हुआ था तो देश में पीएम कौन था। कैसे दोषियों को बचाया गया। एक तरफ राजीव गांधी के हत्यारों को सजा देने से बचाने के लिए चिठ्टी लिखते हैं। ये हास्यास्पद है।

कलराज मिश्रा: बीजेपी के नेता कलराज मिश्रा ने कहा कि राहुल गांधी का बयान आश्चर्यजनक है और जनता को गुमराह करने वाला बयान है। जबकि नरेंद्र मोदी को सभी लीगल एजेंसियों से क्लीन चिट मिल गई है। राहुल 84 सिख दंगों पर भी भ्रमित करने वाला बयान दे रहे हैं। सभी जानते हैं कि किन लोगों ने ये कत्लेआम किया था। उनके पिता ने ही ये बयान दिया था कि बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। इस तरह का हल्का बयान किसी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष को शोभा नहीं देता।


नीतीश कुमार:
बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हम राहुल गांधी के बयान से सहमत नहीं हैं। 84 के सिख दंगे और 89 के भागलपुर दंगों के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है। गुजरात दंगों के लिए बीजेपी की सरकार जिम्मेदार थी। इस जिम्मेदारी से कोई नहीं बच सकता है। इसकी जिम्मेदारी उन्हें लेनी चाहिए।

नरेश गुजराल: शिरोमणि अकाली दल के नेता नरेश गुजराल ने कहा कि राहुल ने कहा कि 2002 के दंगों के समय मोदी मुख्यमंत्री थे इसलिए दोषी हैं। वो शायद ये भूल गए कि उनके पिताजी राजीव गांधी 1984 में पीएम थे और उस समय दंगा नहीं, वो सिखों का कत्लेआम था। ऊपर से ऑर्डर थे और तीन दिनों तक आर्मी नहीं बुलाई गई। हजारों सिखों का कत्लेआम हुआ। इसके बाद दोषियों को मिनिस्टर और एमपी बनाया गया। राहुल गांधी ये भूल रहे हैं कि 84 में एक भी गोली नहीं चली। लेकिन गुजरात में पुलिस ने दंगाइयों पर गोली चलाई हिंसा करने वाले हिंदू मारे गए। लोगों को जेल भेजा गया, सजा मिली। राहुल गांधी ये बता दें कि 84 के दंगों में कितनों को सजा मिली।


एस एच फुल्का: वरिष्ठ अधिवक्ता एस एच फुल्का ने राहुल गांधी के बयान पर कहा कि गुजरात दंगो और 84 के दंगों में अंतर है। ये बात सही है। गुजरात के दंगों में सैकड़ों हिंदू भी मरे थे। लेकिन 84 के दंगों में केवल और केवल सिख मरे थे। गुजरात दंगों में कई अधिकारी और मंत्री जेल गए, एसआईटी बनी लेकिन 84 दंगों में किसी को कोई सजा नहीं मिली। एसआईटी तक नहीं बनी है अभी तक। इसमें उल्टा सिखों को ही गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। ये लोग कहते हैं कि 84 दंगों में सरकार शामिल नहीं थी। अगर सरकार शामिल नहीं थी तो पुलिस मूक दर्शक क्यों बनी रही। एक महावीर चक्र विजेता सिख ने अपनी जान बचाने के लिए गोली चलाई तो उसे जेल मिली।


डी पी त्रिपाठी:
राकांपा नेता डी पी त्रिपाठी ने कहा कि 1984 दंगों में कांग्रेसी भी शामिल थे लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। 

मो. अदीब: राज्यसभा सांसद मो. अदीब ने कहा कि लगता है राहुल गांधी के पास सेट जवाब थे और अर्नब गोस्वामी के पास सेट सवाल थे। राहुल गांधी के पास अपना एजेंडा था। अदीब ने कहा कि अगर वे कांग्रेसी होते और उन्हें जवाब देना होता तो ये कहता कि सिख दंगों के लिए देश के प्रधानमंत्री ने माफी मांगी थी लेकिन गुजरात की सरकार और सीएम मोदी ने अभी तक माफी नहीं मांगी है। ये बुनियादी अंतर है। राहुल ये जवाब नहीं दे पाए।

शाहिद सिद्दीकी: वरिष्ठ पत्रकार शाहिद सिद्दीकी ने कहा कि राहुल का  इंटरव्यू अच्छा था। लेकिन राहुल काफी कन्फ्यूज थे। राहुल गांधी केजरीवाल बनने की कोशिश न करें वो राहुल गांधी ही रहें तभी उनको फायदा होगा। मोदी का मुकाबला करना है तो मुद्दों पर बहस करें। वो मोदी से डिबेट पर भागते क्यू हैं। मैं मुसलमान हूं। जितना मुझे गुजरात दंगे का दुख है उतना ही भागलपुर और दूसरे दंगों के लिए है। मैं 84 के दंगे में था। 84 के दंगों पर किसी को अभी तक सजा नहीं मिली है। गुजरात में तो कुछ हद तक इंसाफ हुआ है। वहां अधिकारी और नेता जेल गए हैं। राहुल गांधी इंसाफ देना सीखें, दंगों पर राजनीति ना करें।

अली अनवर: जेडीयू नेता अली अनवर ने कहा राहुल ये बात भूल रहे हैं कि उनके पिताजी ने कहा था कि जब कोई बड़ा दरख्त गिरता है तो धरती तो हिलती ही है। उनका कहना सही है कि गुजरात में सरकार शामिल थी। लेकिन उनकी सरकार की तरफ से भी गलतियां हुई हैं और छुपाने की कोशिश हुई थी। प्रधानमंत्री रहते हुए राजीव का ये कहना दंगों को जस्टिफाई करना ही तो है।


अरुण जेटली: राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने कहा कि राहुल को सही जानकारियां नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि 2002 के दंगों को नियंत्रित करने के लिए गुजरात सरकार ने कारगर कदम उठाए जबकि 1984 के सिख विरोधी दंगों पर काबू पाने के लिए ऐसा कुछ नहीं किया गया।

रविशंकर प्रसाद: पार्टी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने राहुल से यह बताने को कहा कि कांग्रेस में यह कौन सी ‘सत्ता की एकाग्रता’ है जिसके चलते वह अपनी पार्टी के उपाध्यक्ष बने और उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने का ‘समूहगान’ शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर नरेंद्र मोदी का उदाहरण है जो गरीबी में पैदा हुए और अपनी कड़ी मेहनत, ईमानदारी और शासन के अपने रिकार्ड की बदौलत प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के स्तर तक पंहुचे।


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