अब जनता की राय जरूरी नहीं ?

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Tuesday, January 28, 2014-3:42 PM

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव से लेकर अब अपने और पार्टी के हर फैसले से पूर्व जनता के बीच जाने वाली पार्टी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगता है कि अब जनता से राय लेना मुनासिब नहीं समझते हैं। शायद, यही वजह  है कि पिछले दिनों 4 पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर रेल भवन के सामने धरना पर बैठते और लक्ष्मी नगर से विधायक विनोद कुमार बिन्नी के खिलाफ कार्रवाई करते वक्त उन्होंने जनता से रायशुमारी करना मुनासिब नहीं समझा।

यह बात हम नहीं, बल्कि राजधानी के वही लोग कह रहे हैं, जो कभी केजरीवाल के हर फैसले का स्वागत किया करते थे और उसे जनता का फैसला बताते थे। हालांकि कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो अब भी केजरीवाल के इन दोनों फैसलों का स्वागत करते हैं लेकिन उनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है। लोगों का कहना है कि शुरू से अब तक केजरीवाल हर फैसले से पहले कहा करते थे कि हम पहले जनता से रायशुमारी करेंगे, इसके बाद ही कोई निर्णय लेंगे लेकिन हाल के दिनों में वह भी अन्य नेताओं व राजनीतिक पार्टियों की राह पकड़ चुके हैं।

यदि ऐसा नहीं है तो उन्होंने धरना देने से पहले लोगों से क्यों नहीं पूछा कि इस निर्णय में उनकी क्या राय है? बिन्नी को पार्टी से निकालने के वक्त भी उन्हें लोगों की याद नहीं आई। कम से कम बिन्नी के विधानसभा क्षेत्र लक्ष्मी नगर की जनता से ही रायशुमारी करवा लेते तो लोगों के मन में उनके प्रति विश्वसनीयता बनी रहती लेकिन हाल के दिनों में उनके फैसले ने हमें उनपर संदेह करने को मजबूर कर दिया है।

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