समलैंगिकता मामला: SC के इंकार से एलजीबीटी समुदाय निराश

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Wednesday, January 29, 2014-12:40 AM

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय द्वारा देश में समलैंगिक संबंधों को अपराध बनाने के निर्णय की समीक्षा करने से इंकार के बाद समलैंगिक (एलजीबीटी) समुदाय के सैंकड़ों सदस्य ने शीर्ष अदालत के इस फैसले का विरोध किया है। समुदाय के सदस्यों ने आज जंतर-मंतर पर कैंडल मार्च निकाला और कहा कि समान अधिकारों के लिए वे अपना संघर्ष जारी रखेंगे।

कार्यकर्ता कविता कृष्णन ने कहा, ‘‘आठ समीक्षा याचिका है इनमें से सभी पर काफी बहस हुई और इनमें कहा गया कि शीर्ष अदालत द्वारा समलैंगिकता को फिर से अपराध बनाना गलत है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने महज आधे घंटे में धारा 377 के खिलाफ प्रोफेसरों, शिक्षकों और एलजीबीटी लोगों के अभिभावकों के सशक्त तर्क को खारिज कर दिया।’’

भादंसं की धारा 377 में ‘‘प्रकृति के नियमों के खिलाफ’’ यौन गतिविधियां अपराध हैं जिनमें समलैंगिक कृत्य भी शामिल हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2009 में वयस्कों के बीच सहमति से यौन क्रिया के मामले में इस धारा को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। पिछले वर्ष दिसम्बर में उच्चतम न्यायालय ने इस फैसले को पलट दिया था।


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