राहुल पर भाजपा का चौतरफा हमला

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Wednesday, January 29, 2014-1:49 AM
नई दिल्ली,: गुजरात में 2002 के दंगों के बारे में राहुल गांधी की टिप्पणियों पर भाजपा ने चौतरफा हमला बोला है। कड़ी आलोचना करते हुए भाजपा ने मंगलवार को कहा कि उस हिंसा को रोकने के लिए राज्य पुलिस की फायरिंग में कई दंगाई मारे गए। जबकि 1984 के सिख विरोधी दंगे ‘राज्य प्रायोजित’ थे, जिसे रोकने के लिए पुलिस ने एक भी गोली नहीं चलाई और दंगाई भीड़ ‘खून का बदला खून’ के नारे लगा कर खुलेआम सिखों की हत्याएं करती रही।
 
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने राहुल को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि गुजरात दंगों के बारे में कांग्रेस उपाध्यक्ष ‘जानकारी के अभाव’ से ग्रस्त हैं। उन्होंने उस बारे में ‘जिम्मेदाराना’ बयान नहीं दिया है। गुजरात दंगों को रोकने के लिए राज्य सरकार की ओर से कार्रवाई नहीं होने और सिख विरोधी दंगों को रोकने के लिए तत्कालीन कांग्रेस शासन द्वारा कार्रवाई करने संबंधी राहुल के बयान को पूरी तरह गलत बताते हुए जेटली ने कहा कि सच्चाई इसके उलट है।
 
उन्होंने कहा कि गुजरात में हजारों लोग गिरफ्तार किए गए और पुलिस ने हालात पर काबू पाने के लिए कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर फायरिंग की जिसमें लगभग 300 दंगाई मारे गए। हजारों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ और सैंकड़ों को सजा हुई।
 
जेटली ने कहा कि दूसरी ओर 1984 के दंगों में 31 अक्तूबर की दोपहर को एम्स, जहां इंदिरा गांधी का पार्थिव शरीर रखा हुआ था, वहां ‘खून का बदला खून’ के नारे लगने लगे और कथित रूप से कांग्रेस नेता हजारों सिखों की हत्या करने वाली भीड़ की अगुवाई करते देखे गए। 
जेटली ने कहा कि दंगों के लिए मोदी पर लगाए गए सभी आरोप गलत साबित हो चुके हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित विशेष जांच दल सहित कई जांचों का सामना कर चुके हैं और उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं पाया गया।  
 
कांग्रेस उपाध्यक्ष से जेटली ने सवाल किया कि राहुल गांधी की कल्पना में यह कहां सेे आया कि 1984 (दंगों) में राज्य की कोई मिलीभगत नहीं थी।  उन्होंने कहा कि 1984 के दंगों के मामलों की जांच नहीं की गई। जांच आयोग गठित किया गया जिसने ढोंगी रिपोर्ट दी। 
 
भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने भी राहुल के आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए आरोप लगाया कि 1984 की तबाही राज्य प्रायोजित थी और दिल्ली की सड़कों पर सिखों को जिंदा जलाया जा रहा था। दिल्ली सरकार ने दंगाइयों को तितर बितर करने के लिए कुछ नहीं किया।
 
उन्होंने कहा कि दूसरी ओर गुजरात सरकार ने 2002 के दंगाइयों पर 10 हजार राउंड गोलियां चलाई जिसमें 190 से अधिक दंगाई मारे गए।
उन्होंने कहा कि गुजरात के दुर्भाग्यपूर्ण दंगों को किसी ने सही नहीं ठहराया। लेकिन, दूसरी ओर उनके (राहुल) पिता राजीव गांधी ने 1984 के नरसंहार को यह कह कर सही ठहराया कि ‘जब एक बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती में कंपन होती है’।
 
जबकि सच्चाई इसके उलट यह है कि जब धरती डोलती है तो बड़े पेड़ गिरते हैं। उधर, पार्टी के अन्य नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया कि 1984 के सिख विरोधी दंगों में गुजरात दंगों से कहीं अधिक लोग मारे गए थे।

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