सी.आर.एस. की रिपोर्ट पर टिका कटड़ा ट्रेन का भविष्य

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Wednesday, January 29, 2014-10:22 AM

जम्मू/कटड़ा: श्री माता वैष्णो देवी के आधार शिविर कटड़ा में ट्रेन पहुंचाने को लेकर रेलवे पूरा जोर लगा रहा है, लेकिन सी.आर.एस. की 3 दिवसीय जांच की रिपोर्ट पर ही कटड़ा ट्रेन का भविष्य निर्भर होगा। ऊधमपुर-कटड़ा रेल ट्रैक के अपने दूसरे दिन के निरीक्षण में उत्तर रेलवे के कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (सी.आर.एस.) आर.के. करदम ने करीब 2 घंटे पुल नंबर-186 (झज्जर पुल) की जांच की। इसी पुल को लेकर कई प्रकार की अटकलों का बाजार गर्म है। 

अपने पहले दिन की जांच में सी.आर.एस. ने ऊधमपुर रेलवे स्टेशन से ऊधमपुर-कटड़ा रेलवे ट्रैक पर ब्रिज नंबर-165 तक जांच की थी और अगले दिन की जांच इसी पुल से आगे बढ़ाई। दूसरे दिन की जांच में सी.आर.एस. ने अपने अधिकारियों की टीम, जिसमें डी.आर.एम. एन.सी. गोयल भी शामिल थे, के साथ मोटर ट्राली से फिर से ट्रैक की जांच शुरू की। इस 25 किलोमीटर लंबे ऊधमपुर-कटड़ा रेल ट्रैक पर दूसरे दिन की जांच झज्जर पुल तक आकर ठहर गई।

हालांकि इससे पहले उन्होंने सुरंग नंबर टी-25 की जांच की और निरंतर होने वाले पानी के बहाव को भी देखा, जोकि अक्सर बरसात में बढ़ जाता है। इसके बाद जांच ब्रिज नंबर-186 पर आकर रुक गई। सी.आर.एस. ने करीब 2 घंटे तक इस पुल का निरीक्षण किया, क्योंकि बताया जा रहा है कि निर्माण के बाद से ही इस पुल के बीयरिंग में खराबी आ गई है। ऐसे में इस पुल से अधिक गति से ट्रेन नहीं गुजारी जा सकती है। इस पुल को झज्जर पुल के नाम से जाना जाता है और यह इस ट्रैक का सबसे लंबा और करीब 85 मीटर ऊंचा पुल है। हालांकि अपने दूसरे दिन के दौरे में भी वह कटड़ा रेलवे स्टेशन तक नहीं पहुंच पाए और करीब 4 किलोमीटर पीछे से ही अपनी जांच को समाप्त कर वापस लौट गए।

अब 29 जनवरी को इस ट्रैक को लेकर उनका अंतिम निरीक्षण है और संभव है कि इसमें डिवीजनल मैटीरियल ट्रेन (डी.एम.टी.) को झज्जर पुल से गुजारा जाएगा, जोकि अभी चक्क रकवाल रेलवे स्टेशन पर ही खड़ी है। इस ट्रेन में इंजन के पीछे 13 डिब्बे हैं जो कि पत्थरों से पूरी तरह से भरे हुए हैं। इसे गुजारने के बाद ही पुल की असली तस्वीर सी.आर.एस. के सामने साफ हो पाएगी।  ऐसे में अब इस 25 किलोमीटर लंबे ऊधमपुर-कटड़ा रेल ट्रैक का भविष्य सी.आर.एस. की 3 दिवसीय जांच की रिपोर्ट पर ही निर्भर है। अगर रिपोर्ट में ट्रैक को हरी झंडी मिली तो कटड़ा ट्रेन को हरी झंडी मिलेगी, अन्यथा यह मामला अटक सकता है। अटकलें ऐसी भी हैं कि झज्जर पुल को लेकर सी.आर.एस. आपत्ति जता सकते हैं और इससे 2 फरवरी को प्रधानमंत्री द्वारा इस ट्रैक के साथ पहली ट्रेन के उद्घाटन का जो कार्यक्रम है, वह आगे टल सकता है। 


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