‘किशोर’शब्द की नये सिरे से व्याख्या पर कोर्ट ने सुनवाई पूरी की

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Wednesday, January 29, 2014-10:26 PM

नई दिल्ली :  उच्चतम न्यायालय ने‘किशोर’ शब्द की नये सिरे से व्याख्या करने और जघन्य अपराध में आरोपी के किशोरवय का निर्धारण किशोर न्याय बोर्ड की बजाय फौजदारी अदालत पर छोडऩे के लिये दायर याचिकाओं पर आज सुनवाई पूरी कर ली। 

 
 ये याचिकायें भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी और 16 दिसंबर के सामूहिक बलात्कार की शिकार युवती के पिता द्वारा दायर की गई हैं। प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।  इस युवती के पिता ने किशोर न्याय :बच्चों की देखभाल और संरक्षण: कानून, 2000 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। केन्द्र सरकार ने इसका विरोध किया है। 
 
युवती के पिता के वकील अमन हिंगोरानी ने कहा कि 16 दिसंबर की वारदात में शामिल किशोर की ‘मानसिक और बौद्धिक परिपक्वता’ को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए और चार अन्य आरोपियों की तरह ही उस पर भी मुकदमा चलाया जाना चाहिए। इस वारदात में चार अभियुक्तों को मौत की सजा सुनायी गयी है।
     
 

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