जाली नोट मामले में छह आरोपियों को उम्रकैद की सजा

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Thursday, January 30, 2014-6:53 PM
मुम्बई: यहां की विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत ने वर्ष 2009 के जाली नोट मामले में छह आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुना और भारतीय नकली नोटों के गोरखधंधे को ‘आतंकवाद का कृत्य’ करार दिया। एनआईए अदालत का इस तरह का यह पहला फैसला है। विशेष एनआईए न्यायाधीश पृथ्वीराज चव्हाण ने कल छह आरोपियों-अब्दुल शेख, मोहम्मद एजुल, रवि धीरेन घोष नुरूद्दीन बारी, मोहम्मद समान और एजुल शेख को भादसं और अवैध गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराने के बाद सजा सुनाई।

अदालत ने उन पर 1000-1000 रूपया जुर्माना भी लगाया। विशेष सरकारी वकील रोहिणी सालियां ने कहा, ‘‘ऐसा पहली बार हुआ है कि जाली नोट को आतंकवादी कृत्य के नजरिए से देखा गया। ’’ उन्होंने कहा कि आतंकवादी कृत्य हमेशा खून खराबा वाला अपराध ही नहीं होता। जाली नोट पाकिस्तान में छपे थे। जाली नोट का यह पहला मामला है जिसकी जांच एनआईए ने की है।

एनआईए ने कहा कि जांच के दौरान पता चला कि दो स्थानों से 1000-1000 रूपए के जाली नोट जब्त किए गए और उनके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है और इन जाली नोटों का स्रोत कराची है। महाराष्ट्र के आतंंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने 14 मई, 2009 को दक्षिण मुम्बई के मजगांव में स्टार सिनेमा के पास इन छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था। एटीएस को उनके पास से 1000-1000 रूपए के जाली नोट मिल थे। प्रारंभिक जांच एटीएस ने की थी और बाद में जांच एनआईए को सौंप दिया गया था।

 


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