इस समय दरों में कटौती की बात करना खुशफहमी : राजन

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Thursday, January 30, 2014-11:21 PM

नई दिल्ली : आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिये ब्याज दरों में कटौती का प्रतिवाद करते हुये रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने आज कहा कि इस समय दरों में कटौती की बात करना ‘‘खुशफहमी’’ है और ऐसा सोचना कि केन्द्रीय बैंक आर्थिक वृद्धि के रास्ते में आड़े आ रहा है ‘व्यर्थ की बात’ है।

उन्होंने कहा ‘‘कुछ अधिकारियों और उद्योगपतियों का यह सोचना है कि आप ब्याज दरों में कटौती कीजिये और फिर चमत्कार होगा और वृद्धि होने लगेगी। मेरा मानना है कि इस समय ऐसा सोचना खुशफहमी है इस तरह की धारणा पालना कि रिजर्व बैंक आर्थिक वृद्धि में बाधक बन रहा है यह ‘निरर्थक’ है।

राजन ने मंगलवार को तीसरी तिमाही मौद्रिक समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दर रेपो में 0.25 प्रतिशत वृद्धि कर उसे 8 प्रतिशत कर दिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने का सबसे अच्छा तरीका मुद्रास्फीति को नीचे रखना है। सीएनबीसी टी18 के लिये करण थापर को दिये साक्षात्कार में राजन ने कहा ‘‘एक बार मुद्रास्फीति नीचे आने पर आप आर्थिक वृद्धि बढ़ाने के लिये ब्याज दरों में तेजी से कटौती कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में मुद्रास्फीति की चिंता किये बिना आप वृद्धि पर ध्यान दे सकते हैं।’’

राजन ने ब्लूमबर्ग टीवी को दिये एक अन्य साक्षात्कार में कहा कि मुद्रास्फीति और वृद्धि के बीच किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। जब तक कीमतें कम नहीं होतीं हैं तब तक बैंकों के लिये ब्याज दरें कम करना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मुद्रास्फीति उंची रहने की स्थिति में बैंकों के लिये जमा पर भी ब्याज दरें कम करना संभव नहीं।


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