व्यापारी खेमों में बंटा ‘विजय चौक’, नतीजा अतिक्रमण

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Friday, January 31, 2014-1:44 PM

नई दिल्ली (नेमिष हेमंत)। पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर के विजय चौक पर सियासत हावी है। छोटी-बड़ी 500 दुकानों वाला यह बाजार मोटे तौर पर 2 राजनीतिक (कांग्रेस और भाजपा) खेमों में बंटा है। इस खेमेबंदी ने बाजार को अतिक्रमण, जाम की समस्या, गंदगी और सरेराह दुकानों के ताला टूट  जाने वाली पहचान दिलाई है। केजरीवाल की सरकार बनने के बाद बिजली कटौती बाजार के लिए नई मुसीबत है।
मुख्य समस्याएं : अतिक्रमण, पार्किंग, साफ-सफाई और हाल के दिनों में बढ़ती चोरियां। माह भर से अघोषित विद्युत कटौती।

नहीं हुआ चुनाव
भाजपा के बूथ संयोजक व बाजार में कॉस्मैटिक की दूकान चलाने वाले शिव कुमार गुप्ता का कहना है कि पिछले 20 सालों से लक्ष्मी नगर टे्रड एसोसिएशन का चुनाव नहीं हुआ। व्यापारियों की कभी बैठकें नहीं हुईं। उनके मुताबिक, खुद दुकानदारों को अतिक्रमण पर आम योजना बनाकर काम करना चाहिए। लक्ष्मी नगर बाजार पूर्वी दिल्ली के बड़े बाजारों में एक है। एक व्यापारी के मुताबिक यहां प्रतिदिन आने वाले ग्राहकों की संख्या 10 हजार से ऊपर है।

बीच सड़क तक अतिक्रमण
जैन मैडीकोज के मालिक विकास जैन के मुताबिक पुलिस अतिक्रमण हटाने की बजाए रेहड़ी-पटरी वालों से खुलेआम पैसे वसूलते हैं। बाजार में महिला शौचालय प्रस्तावित था लेकिन नहीं बना। स्ट्रीट लाइट भी नहीं है। बाजार में खरीददारी करने आईं प्रभा रावत के मुताबिक दुकानों के पटरियों तक आ जाने, सड़क पर रेहड़ी वालों की भरमार और बेतरतीब खड़ी गाडिय़ों से इस बाजार में पैर रखना भी मुश्किल हो गया है।

गंदगी की भरमार
सैलेक्शन दुपट्टा सैंटर के मालिक प्रेम प्रकाश भी एसोसिएशन का चुनाव न होने को बड़ी खामियों में गिनाते हैं। उनके मुताबिक अगर हर साल चुनाव होते और नए, पढ़े-लिखे लोग अध्यक्ष बनते तो व्यवस्थाएं बदलती। उन्होंने कहा कि 10 दिनों से यहां कूड़ा पड़ा है लेकिन नहीं हटा।

हर साल होते हैं चुनाव : प्रधान
बाजार के करीब 2 दशक से प्रधान प्रद्युम जैन ने एसोसिएशन के चुनाव न होने के आरोपों को खारिज करते हंै। उनके मुताबिक 2 वर्षों पर चुनाव होता है। सबसे जरूरी पार्किंग की समस्या को दूर करना है। इसके लिए उन्होंने मल्टीलेबल पार्किंग की मांग रखी है। विद्युत कटौती नई मुसीबत बना है। सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे हैं। अतिक्रमण के लिए वे पुलिस को जिम्मेदार ठहराते हैं।

सौंदर्यीकरण की मांग
छाबड़ा क्लाथ इम्पोरियम के संदीप छाबड़ा के मुताबिक सरकार ने इस बाजार पर कोई ध्यान नहीं दिया। दिल्ली के अन्य बाजारों की तरह इसे भी विकसित किया जा सकता है। करोलबाग की तरह एक समान साइन बोर्ड होतेे। खरीददारों के लिए बेंच और स्ट्रीट लैम्प जैसी व्यवस्थाएं होनी चाहिए।


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